
Maharashtra Politics: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के भीतर हलचल तेज हो गई है। लोक सभा के 9 में से छह सांसदों के पाला बदलने के बाद अब कोल्हापुर के जिला अध्यक्ष रविकिरण इंगवले ने अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि उन्होंने अपने इस्तीफे में कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया, लेकिन मीडिया से बातचीत में दिए गए उनके बयान ने पार्टी के अंदर चल रही खींचतान और असंतोष की ओर इशारा किया है।
इस्तीफे के बाद रविकिरण इंगवले ने कहा, "आखिर कब तक अकेले मोर्चा संभालता रहूं?" उनके इस बयान ने कोल्हापुर के राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज कर दिया है।
रविकिरण इंगवले जिले में ठाकरे गुट के मजबूत और सक्रिय नेता कहे जाते हैं। वह दो बार शहर प्रमुख की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। पिछले साल उन्हें जिला प्रमुख बनाया गया था, लेकिन उनकी नियुक्ति के बाद से ही पार्टी के कुछ नेताओं में नाराजगी और असंतोष की खबरें सामने आने लगी थीं।
पार्टी के उपनेता संजय पवार, हर्षल सुर्वे और अन्य नेताओं के बीच मतभेद पहले भी सार्वजनिक हो चुके हैं। इस्तीफों और दल-बदल की घटनाओं ने स्थानीय संगठन को पहले ही कमजोर किया था।
पिछले कुछ दिनों से रविकिरण इंगवले की कार्यशैली और संगठन में समन्वय की कमी को लेकर भी चर्चाएं चल रही थीं। इसी बीच इंगवले और शहर प्रमुख मंजीत माने के बीच कथित फोन पर हुई तीखी बहस की ऑडियो रिकॉर्डिंग सोशल मीडिया पर वायरल होने से विवाद और बढ़ गया। ऐसे में उनका इस्तीफा पार्टी के भीतर चल रही नाराजगी को फिर से उजागर करता नजर आ रहा है।
रविकिरण इंगवले ने साफ किया कि उन्होंने सिर्फ जिला प्रमुख पद से इस्तीफा दिया है, पार्टी नहीं छोड़ी है। उन्होंने कहा, "मैं कब तक अकेला फॉरवर्ड बनकर खेलता रहूं? अब मेरी इच्छा डिफेंस में जाने की है। इसलिए मैंने फिलहाल आराम करने के लिए यह फैसला लिया है।"
उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें किसी व्यक्ति से कोई निजी शिकायत या दुश्मनी नहीं है। हालांकि उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा, "मेरे बारे में बयान देने वाले यह याद रखें कि हर किसी की पूरी कुंडली मेरे पास है।"
रविकिरण इंगवले के इस्तीफे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि अब पार्टी नेतृत्व कोल्हापुर की कमान किसे सौंपता है। इस पर भी सभी की नजरें टिकी हैं कि क्या इंगवले ठाकरे गुट के साथ बने रहेंगे या कोई नया राजनीतिक फैसला लेंगे। फिलहाल स्थानीय कार्यकर्ताओं में इसको लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।