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9 में से 6 सांसद तो गए, अब छिनेगा संसद में दफ्तर! उद्धव सेना के सामने मंडरा रहा नया संकट

Shiv Sena UBT: शिवसेना (यूबीटी) के 6 सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में जाने के बाद उद्धव ठाकरे को बड़ा झटका लग सकता है। सांसदों की संख्या 4 रह जाने पर संसद में पार्टी कार्यालय भी छिन सकता है।
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मुंबई

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Dinesh Dubey

Jun 24, 2026

Uddhav Thackeray Shiv Sena Operation Tiger

बेटे आदित्य ठाकरे के साथ उद्धव ठाकरे (Photo: IANS/File)

Uddhav Thackeray: महाराष्ट्र की राजनीति में 'ऑपरेशन टाइगर' के तहत छह लोक सभा सांसदों के एकनाथ शिंदे नीत शिवसेना में शामिल होने के बाद उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) को एक और बड़ा झटका लग सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सांसदों की संख्या घटने के कारण पार्टी का संसद भवन परिसर में मौजूद कार्यालय भी हाथ से जा सकता है।

मिली जानकारी के अनुसार, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला द्वारा छह बागी सांसदों के शिंदे गुट में विलय को औपचारिक मंजूरी मिलते ही शिवसेना (यूबीटी) के लोकसभा सांसदों की संख्या 9 से घटकर सिर्फ 4 रह जाएगी। संसद के नियमों के मुताबिक, आमतौर पर संसद परिसर में अलग कार्यालय उन्हीं दलों को आवंटित किया जाता है, जिनके कम से कम पांच सांसद हों। ऐसे में उद्धव गुट का मौजूदा कार्यालय छिनने की आशंका जताई जा रही है।

संसद में कहां है उद्धव सेना का कार्यालय?

फिलहाल शिवसेना (यूबीटी) का संसदीय कार्यालय पुराने संसद भवन यानी संविधान सदन (Samvidhan Sadan) के कक्ष संख्या 128A में संचालित होता है। यह कमरा कक्ष संख्या 128 के ठीक बगल में स्थित है, जो कभी अविभाजित शिवसेना को आवंटित किया गया था।

अब सांसदों की संख्या कम होने के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या उद्धव सेना का यह कार्यालय बना रहेगा या छिन जाएगा।

6 सांसदों की बगावत से बदला राजनीतिक समीकरण

हाल ही में शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों ने आधिकारिक रूप से एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का दामन थाम लिया। इसके बाद पार्टी की संसदीय इकाई लगभग दो हिस्सों में बंट गई।

शिंदे गुट में शामिल होने वाले सांसदों में संजय दिना पाटिल, संजय देशमुख, संजय जाधव, भाऊसाहेब वाकचौरे, नागेश पाटिल अष्टीकर और ओमराजे निंबालकर शामिल हैं।

इन सांसदों की संख्या दल-बदल कानून के तहत आवश्यक दो-तिहाई आंकड़े को पूरा करती है, जिससे उनके विलय को फिलहाल कोई खतरा नहीं दिख रहा।

इस बगावत की पटकथा पिछले कई हफ्तों से लिखी जा रही थी। इस बीच, 18 जून को नई दिल्ली में शिवसेना (यूबीटी) की संसदीय दल की बैठक बुलाई गई थी, व्हिप जारी करने के बावजूद 9 में से छह सांसद नहीं आये थे। केवल तीन लोक सभा सांसद अनिल देसाई, अरविंद सावंत और राजाभाऊ वाजे ही बैठक में पहुंचे थे। तभी से उनके शिंदे गुट में जाने की अटकलें तेज हो गई थीं। कुछ दिनों बाद ये अटकलें सच साबित हुईं और सभी छह सांसदों ने औपचारिक रूप से शिंदे गुट का साथ दे दिया।

स्पीकर के फैसले पर टिकी नजर

हालांकि, छह सांसदों के विलय को लेकर लोक सभा अध्यक्ष की औपचारिक मंजूरी अभी बाकी है। राजनीतिक गलियारों में अब सभी की निगाहें स्पीकर के फैसले पर टिकी हैं।

सियासी जानकारों का कहना है कि सांसदों की संख्या घटने का असर सिर्फ कार्यालय तक सीमित नहीं रहेगा। संसद में पार्टी की मौजूदगी कमजोर होने से राष्ट्रीय स्तर पर उसकी राजनीतिक भूमिका भी प्रभावित हो सकती है। इंडिया गठबंधन में भी उद्धव सेना की आवाज पहले से कमजोर पड़ सकती है। यहां तक की केंद्र सरकार की सर्वदलीय बैठकों में भी पांच से कम सांसद होने के कारण उद्धव सेना को हर बार आमंत्रित नहीं किया जा सकता है।

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