Maharashtra Vidhan Parishad Election 2026: महाराष्ट्र में इस समय विधान परिषद की कुल 17 सीटों पर 18 जून को होने वाले चुनाव को लेकर सियासी पारा चढ़ा हुआ है।
महाराष्ट्र में आगामी विधान परिषद चुनाव (MLC) को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। 17 सीटों पर होने वाले चुनाव से पहले सत्तारूढ़ महायुति के भीतर सीट बंटवारे को लेकर जोरदार खींचतान जारी है। खासकर पुणे, रायगढ़ और रत्नागिरी-सिंधुदुर्ग सीटों को लेकर भाजपा, शिवसेना (शिंदे गुट) और एनसीपी (सुनेत्रा पवार गुट) के बीच सहमति बनती नहीं दिख रही है। जबकि महायुति नेतृत्व चुनाव में एकजुट होकर उतरना चाहता है, लेकिन किस दल को कितनी सीटें मिलेंगी, इस पर अभी तक अंतिम फैसला नहीं हो सका है।
जानकारी के मुताबिक, भाजपा ने शिवसेना को चार सीटों का प्रस्ताव दिया है, जबकि शिंदे गुट छह सीटों की मांग पर अड़ा हुआ है। इसी वजह से सीट बंटवारे का फार्मूला अब तक घोषित नहीं किया गया है। इस बीच, सांसद पार्थ पवार दिल्ली में ही डेरा डाले हुए हैं। एनसीपी हर हाल में पुणे सीट चाहती है।
निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 1 जून है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि महायुति के सीट बंटवारे का अंतिम फैसला अगले 24 घंटों के भीतर सार्वजनिक कर दिया जाएगा। जिससे उम्मीदवारों को प्रचार और अन्य तैयारियों के लिए पर्याप्त समय मिल सके।
इस बार पुणे की एमएलसी सीट महायुति के भीतर प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गई है। भाजपा और राष्ट्रवादी कांग्रेस (सुनेत्रा पवार) दोनों इस सीट पर दावा ठोक रहे थे। पुणे शहर और जिले के भाजपा विधायकों ने सीधे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सामने अपनी बात रखकर यह सीट पार्टी के खाते में रखने की जोरदार पैरवी की थी। जिसके बाद मामला दिल्ली हाई कमान तक पहुंच गया। अब संकेत मिल रहे हैं कि यह सीट राष्ट्रवादी कांग्रेस के खाते में जा सकती है।
खबर है कि राष्ट्रवादी कांग्रेस (अजित पवार गुट) पुणे और रायगढ़ दोनों सीटें हासिल करने में सफल रही है। हालांकि इसके बदले पार्टी को भविष्य में राज्यसभा की एक सीट छोड़नी पड़ सकती है। यह राज्यसभा सीट सुनेत्रा पवार के इस्तीफे के कारण खाली हुई है। राजनीतिक हलकों में इस संभावित समझौते को लेकर चर्चा जोरों पर है, हालांकि किसी भी पक्ष ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार दिल्ली दौरे के बाद मुंबई लौट चुकी हैं, लेकिन उनके बेटे व सांसद पार्थ पवार अभी भी दिल्ली में डटे हुए हैं। वह सीट बंटवारे और अंतिम राजनीतिक समीकरणों को लेकर लगातार पार्टी नेतृत्व और सहयोगी दलों के संपर्क में हैं। उनकी दिल्ली में मौजूदगी को भी इस पूरे घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है।
हाल के वर्षों में महाराष्ट्र की स्थानीय राजनीति में भाजपा की ताकत लगातार बढ़ी है। राज्य के अधिकतर नगर निगमों, नगर परिषदों और नगर पंचायतों में भाजपा का भारी दबदबा है। इसलिए स्थानीय नेतृत्व का मानना है कि जिन क्षेत्रों में संगठन मजबूत हुआ है, वहां जीत की संभावना भी सबसे अधिक है। यही वजह है कि भाजपा आसानी से किसी भी सीट पर समझौता करने के मूड में नहीं दिख रही है।