Muzaffarnagar News: मुजफ्फरनगर में सोनू कश्यप हत्याकांड के पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे भीम आर्मी चीफ व सांसद चंद्रशेखर आजाद को पुलिस ने रास्ते में रोक दिया। इससे नाराज सांसद ने विरोध जताया।
Chandrashekhar azad muzaffarnagar sonu murder: भीम आर्मी चीफ और नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद मंगलवार को मेरठ में मारे गए सोनू कश्यप के परिजनों से मिलने जा रहे थे, लेकिन मुजफ्फरनगर में उन्हें पुलिस ने रोक लिया। सोनू के घर से कुछ दूरी पहले ही सड़क पर ट्रैक्टर-ट्रॉली खड़ी कर काफिले को आगे बढ़ने नहीं दिया गया। अचानक हुई इस कार्रवाई से मौके पर तनाव बढ़ गया और सांसद की गाड़ी को चारों ओर से घेर लिया गया।
पुलिस घेरेबंदी से नाराज चंद्रशेखर आजाद ने खुले तौर पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कहीं भी घटना हो जाए, वह लोगों का दुख बांटने भी नहीं जा सकते। पुलिस का काम अपराध रोकना है, न कि किसी को पीड़ित परिवार से मिलने से रोकना। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि चुनाव के समय हर कोई वोट मांगने जाता है, लेकिन दुख में साथ देने वाला कोई नहीं होता। अगर पुलिस उन्हें मिलने नहीं देगी तो उन्हें गोली मार दे।
सांसद के बयान के बाद स्थिति और संवेदनशील हो गई। मौके पर तीन सीओ सांसद को समझाते नजर आए, लेकिन इस दौरान सड़क पर लंबा जाम लग गया। चंद्रशेखर का काफिला शहर के भोपा पुल के पास नवीन पेट्रोल पंप के नजदीक रोका गया था। राहगीरों और स्थानीय लोगों की भीड़ जुटने से माहौल और तनावपूर्ण हो गया।
इसी बीच पीड़ित परिवार की एक दलित बेटी ने VIDEO कॉल पर अपनी पीड़ा जाहिर की। उसने आरोप लगाया कि उसके भाई सोनू कश्यप को जिंदा जलाकर मारा गया। यह वीडियो सामने आने के बाद मामले ने और तूल पकड़ लिया और दलित संगठनों में आक्रोश और बढ़ गया।
सोनू कश्यप मुजफ्फरनगर के नगर कोतवाली क्षेत्र के किला मोहल्ले का रहने वाला था। 5 जनवरी को मेरठ के सरधना थाना क्षेत्र के ज्वालागढ़ गांव में उसकी ईंट मारकर हत्या कर दी गई। आरोप है कि साक्ष्य मिटाने के लिए शव पर मोबिल ऑयल डालकर जला दिया गया, जिससे अधजली लाश बरामद हुई। पुलिस ने मामले में एक नाबालिग को गिरफ्तार कर खुलासा कर दिया है, लेकिन परिजनों का कहना है कि हत्या सामूहिक रूप से की गई और दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हो रही।
हत्या के बाद से ही जिले में लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। सोमवार को कलेक्ट्रेट में परिजनों और समर्थकों ने धरना देकर आरोपियों को फांसी देने और पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग की। सरधना विधायक अतुल प्रधान ने परिवार से मुलाकात कर एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी, लेकिन परिवार और समर्थकों का कहना है कि जब तक न्याय नहीं मिलेगा, आंदोलन जारी रहेगा।