मुजफ्फरनगर

कोरोना के बाद कुदरत ने बरपाया कहर, बे-मौसम बारिश से लोगों की आंखों में आ गए आंसू

Highlights: -किसानों को उनकी फसल काटने के लिए मजदूर नहीं मिल रहे -जिससे किसानों के खेतो में फसल बर्बाद हो रही है -कोरोना आपदा के बाद कुदरत ने भी किसानों के ऊपर कहर बरपाना शुरू कर दिया है।
less than 1 minute read
screenshot_from_2020-04-26_18-53-43.jpg

मुजफ्फरनगर। जहां एक तरफ किसानों पर कोविड़ 19 की मार पड़ रही है तो वहीं कुदरत भी अपना कहर बरपा रही है। कारण, रविवार को हुई बे मौसम बारिश के साथ आंधी तूफान ने किसानों की फसलों को बर्बाद कर दिया। कई इलाकों में किसान की फसल जल मग्न हो गयीं।

दरअसल, कोरोना वायरस को लेकर देश भर में लॉकडाउन है। जिस वजह से देश का हर नागरिक परेशान है। लॉकडाउन के चलते लोग अपने घरों में रहने को मजबूर हैं। किसानों को उनकी फसल काटने के लिए मजदूर नहीं मिल रहे। जिससे किसानों के खेतो में फसल बर्बाद हो रही है। इस स्तिथि में किसान बर्बादी की कगार पर पहुँच चुका है। वहीं इस कोरोना आपदा के बाद कुदरत ने भी किसानों के ऊपर कहर बरपाना शुरू कर दिया है।

इस बेमौसम बारिश और आंधी तूफान से किसानों की खेतों में खड़ी गेंहू की फ़सल तो खराब हो ही रही है। वहीं खेत में कटी पड़ी गेंहू की फसल भी जल मग्न हो गयी। इसके साथ साथ अन्य फसलों को भी काफी नुकसान हुआ है। किसानों का जितना भी गेहूं कटा पड़ा है व जो खेतों में खड़ा हुआ गेंहू है, वह खराब हो गया है। जिसके बाद किसान सरकार ने मदद की गुहार लगा रहे हैं।

Updated on:
26 Apr 2020 07:13 pm
Published on:
26 Apr 2020 07:07 pm
Also Read
View All
Muzaffarnagar: ‘दूसरी जिंदगी मिल गई’, एक मजदूर के भाग निकलने के बाद खुली कहानी! बंधुआ मजदूरों ने सुनाई कैद की दास्तां

‘सूखी रोटी दी और जानवरों का चारा खिलाया, कुत्तों से कटवाया’, मुजफ्फरनगर बंधुआ मजदूर कांड’ पर फूटा प्रियंका गांधी का गुस्सा

‘काफिर का खून हलाल है’, ज्ञानवापी सर्वे का आदेश देने वाले जज को ISIS की धमकी, सुरक्षा में कटौती का आरोप

दो साल तक कैद जैसी जिंदगी… चोकर की रोटी, डंडों की मार और पिटबुल का पहरा; जानें कैसे छूटे मुजफ्फरनगर की फैक्ट्री से मजदूर

युवराज सिंह के साथ क्रिकेट खेला, पार्षद रहा, फिर बना कुख्यात अपराधी, दिमाग हिला देगी मुजफ्फरनगर में मारे गए बदमाश की कहानी