
कैराना: समाजवादी पार्टी की युवा सांसद इकरा हसन ने संसद के 'शून्य काल' (Zero Hour) के दौरान देश की दो महान विभूतियों के लिए सर्वोच्च नागरिक सम्मान की मांग उठाकर चर्चा छेड़ दी है। कैराना से लोकसभा सदस्य इकरा हसन ने केंद्र सरकार से अपील की है कि महात्मा ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले को मरणोपरांत 'भारत रत्न' से सम्मानित किया जाए।
सांसद इकरा हसन ने सदन में अपनी बात रखते हुए कहा कि महात्मा ज्योतिबा फुले और उनकी पत्नी सावित्रीबाई फुले का भारतीय समाज, विशेषकर शिक्षा के प्रसार और महिला सशक्तिकरण में अतुलनीय योगदान रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि जिस दौर में महिलाओं और पिछड़ों के लिए शिक्षा के दरवाजे बंद थे, उस कठिन समय में इस दंपत्ति ने समाज की रूढ़ियों से लड़कर शिक्षा की अलख जगाई। उनके इसी योगदान को सच्ची श्रद्धांजलि देने के लिए उन्हें 'भारत रत्न' मिलना चाहिए।
संसद में इकरा हसन ने केवल सम्मान की मांग ही नहीं की, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की वर्तमान खामियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने CBSE बोर्ड के निजी स्कूलों द्वारा अभिभावकों पर डाले जा रहे अतिरिक्त आर्थिक बोझ का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। इकरा ने कहा कि कई स्कूल मनमाने ढंग से फीस और अन्य खर्चों में बढ़ोतरी कर रहे हैं, जिससे मध्यम और गरीब परिवारों के लिए शिक्षा दूभर हो रही है। अधिकतर स्कूलों की किताबें एक ही विक्रेता के पास उपलब्ध होती हैं और सिर्फ एक ही पब्लिकेशन उन किताबों को प्रकाशित करता है। इस गोरखधंधे पर रोक लगे।
उन्होंने सरकार से मांग की कि ऐसी शिकायतों पर स्कूल प्रबंधनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। कई स्कूलों द्वारा किताबों और ड्रेस के लिए एक ही दुकानदार तय कर अभिभावकों को महंगी खरीदारी के लिए मजबूर करना गलत है।इस समस्या के समाधान के लिए शिकायत दर्ज करने हेतु एक समर्पित पोर्टल की मांग की।
संसद में अपनी मांग रखने के बाद इकरा हसन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर भी अपना पक्ष रखा। उन्होंने लिखा, शिक्षा के क्षेत्र में क्रांति लाने वाले और दबे-कुचले वर्गों को आवाज देने वाले महात्मा ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले को उनके महान कार्यों के लिए भारत रत्न से नवाजा जाना चाहिए।