मुजफ्फरनगर में 2013 में भड़के साम्प्रदायिक दंगों से जुड़े एक अहम मामले में कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। शाहपुर थाना क्षेत्र के गांव कुटबा में दंगे के दौरान महिला समेत आठ लोगों की हत्या, आगजनी, तोड़फोड़ और लूटपाट के आरोप में नामजद 32 आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया। यह फैसला करीब साढ़े 12 साल बाद आया है।
शाहपुर थाना क्षेत्र के गांव कुटबा में करीब साढ़े 12 साल पहले हुए साम्प्रदायिक दंगे मामले में एसआईटी ने 36 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी, जिसमें चार की मौत हो चुकी है। शेष 32 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चल रहा था। मंगलवार को अपर सत्र न्यायाधीश (पोक्सो कोर्ट नंबर-एक) की अदालत में इस मामले की सुनवाई हुई, जहां पर्याप्त और ठोस साक्ष्य न होने के आधार पर सभी आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया गया।
घटना 7 सितंबर 2013 की है, जब जनपद में व्यापक स्तर पर साम्प्रदायिक हिंसा भड़की थी। पंचायत से लौट रही भीड़ पर कई गांवों में हमले हुए थे, जिसके बाद हालात और बिगड़ गए। आठ सितंबर की सुबह गांव कुटबा में भी हिंसा फैल गई। गांव निवासी इमरान की ओर से दर्ज कराई गई रिपोर्ट के अनुसार, सुबह करीब नौ बजे सैकड़ों लोगों की भीड़ हथियारों से लैस होकर गांव में घुस आई थी। भीड़ के पास राइफल, बंदूक, तमंचे, तलवार और अन्य धारदार हथियार थे।
आरोप था कि हमलावरों ने अंधाधुंध फायरिंग की, धार्मिक स्थलों में तोड़फोड़ की, मकानों में आग लगा दी और घरों से सामान व पशुधन लूट लिया। इस हिंसा में एक महिला सहित आठ लोगों की जान चली गई थी। लंबे समय तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद अब अदालत ने सबूतों के अभाव में आरोपियों को बरी कर दिया है।