
मुजफ्फरनगर। देश की शीर्ष अदालत उच्चतम न्यायालय ने देशभर में जनप्रतिनिधियों के खिलाफ दर्ज हुए अपराधिक मुकदमाें की सुनवाई के लिए विशेष अदालत का गठन किया है। इसेक लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में भी स्पेशल बेंच बनाई गई है। जनपद मुज़फ्फरनगर की बात करें तो यहां 2013 में हुए सांप्रदायिक दंगों के दौरान जनप्रतिनिधियों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मुकदमे भी इनमें शामिल हैं। इनको मुजफ्फरनगर कोर्ट से इलाहाबाद हाईकोर्ट की स्पेशल कोर्ट में जल्द निस्तारण के लिए भेजा गया है।
जल्द शुरू होगी सुनवाई
जनप्रतिनिधियों के पक्ष के अधिवक्ता चंद्रवीर सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट की निगरानी में हाईकोर्ट की स्पेशल कोर्ट अब इन मामलों के जल्द निस्तारण की प्रकिया शुरू करेगी। जल्द ही इन मामलों की सुनवाई शुरू की जाएगी। 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों से जुड़े नेताओं के खिलाफ आपराधिक मुकदमों सहित करीब 30 केसों की फाइलों को इलाहाबाद हाईकोर्ट भेजा गया है। इनमें मुख्य रूप से सांसद संजीव बालियान, कुंवर भारतेंदु सहित विधायक संगीत सोम, उमेश मलिक, सुरेश राणा, साध्वी प्राची संग अन्य सभी जनप्रतिनिधियों की फाइलों को इलाहाबाद हाईकोर्ट भेजा गया है। उनका कहना है कि भारत आजाद होने के बाद पहली बार जनप्रतिनिधियों के मामलों के लिए इस तरह से कोर्ट का गठन किया गया है।
अगस्त 2013 में मुजफ्फरनगर जिले के कवाल गांव में हुई थी हिंसा
जानकारी के मुताबिक 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों से जुड़े जनप्रतिनिधियों के खिलाफ मुकदमों सहित अन्य और केसों की 30 से 35 फाइलों को इलाहाबाद हाईकोर्ट भेजा गया है। आपको बता दें कि अगस्त 2013 को मुजफ्फरनगर जिले के कवाल गांव में दो संप्रदायों में हिंसा के साथ यह दंगा शुरू हुआ था। इन दंगों में करीब 43 लोगों की जान गई थी जबकि 93 लोग घायल हुए थे। बताया जा रहा है कि लड़की से छेड़छाड़ के बाद विवाद बढ़ा था, जिसने बाद में दंगे का रूप ले लिया था।