
Tarun Khatik Murder Case: सावन के महीने में हरिद्वार से लाखों श्रद्धालु कांवड़ लेकर अपने-अपने गंतव्य की ओर लौट रहे हैं। इसी बीच एक ऐसी कांवड़ लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई, जिसे देखकर हर कोई ठहरकर उसकी कहानी जानना चाहता है। इस कांवड़ में एक युवक की प्रतिमा के साथ भगवान शिव की झांकी बनाई गई है। यह झांकी किसी धार्मिक आयोजन से ज्यादा एक परिवार के दर्द और न्याय की उम्मीद को बयां करती है।
यह कांवड़ दिल्ली के उत्तम नगर निवासी दिवंगत तरुण खटीक की याद में उनके परिवार ने निकाली है। परिवार का कहना है कि यह यात्रा सिर्फ आस्था नहीं, बल्कि अपने बेटे को न्याय दिलाने की एक भावनात्मक अपील भी है।
तरुण के बड़े भाई अरुण खटीक अपने परिजनों और समाज के लोगों के साथ हरिद्वार की हर की पौड़ी से गंगाजल लेकर दिल्ली के लिए निकले हैं। कांवड़ के आगे बनाई गई झांकी में भगवान शिव की प्रतिमा के सामने हाथ जोड़कर खड़े तरुण खटीक की प्रतिमा लगाई गई है। मुजफ्फरनगर से गुजरते समय इस कांवड़ ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा। बड़ी संख्या में लोगों ने रुककर झांकी देखी और परिवार से पूरी घटना की जानकारी ली।
परिवार का कहना है कि उनके बेटे की हत्या के मामले में आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। उनका आरोप है कि मामले में गिरफ्तारी तो हुई, लेकिन अब तक उन्हें ऐसा न्याय नहीं मिला, जिसकी उन्हें उम्मीद थी। अरुण खटीक का कहना है कि उन्होंने यह कांवड़ अपने भाई की आत्मा की शांति और न्याय की प्रार्थना के लिए उठाई है। उनका विश्वास है कि भगवान शिव के दरबार में की गई प्रार्थना जरूर सुनी जाएगी।
तरुण खटीक दिल्ली के उत्तम नगर में अपने परिवार के साथ रहते थे। उनके पिता मेमराज रंगाई-पुताई का काम करते हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने बच्चों की पढ़ाई-लिखाई में कोई कमी नहीं आने दी। तरुण परिवार के सबसे छोटे सदस्य थे और सभी के बेहद लाड़ले थे। इसी वर्ष होली के दिन पानी से भरे गुब्बारे के छींटे पड़ने के बाद हुए विवाद में उनकी मौत हो गई थी। इस मामले में पुलिस ने इमरान उर्फ बंटी, अमरुद्दीन, जमाउद्दीन, मुश्ताक, कमरुद्दीन, मुजफ्फर और ताहिर समेत कई आरोपियों को गिरफ्तार किया था। मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।
हर साल कांवड़ यात्रा में श्रद्धालु भगवान शिव को जल अर्पित करने के लिए निकलते हैं, लेकिन इस बार तरुण खटीक के परिवार ने अपनी यात्रा को एक अलग संदेश से जोड़ दिया है। परिवार का कहना है कि यह कांवड़ उनके भाई की याद को जीवित रखने और न्याय की मांग को लोगों तक पहुंचाने का माध्यम है। मुजफ्फरनगर से गुजर रही यह अनोखी कांवड़ इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि इसमें आस्था के साथ एक परिवार का दर्द, अपने बेटे की याद और न्याय की उम्मीद साफ दिखाई देती है।