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POCSO Court Verdict: ‘विवाह से दुष्कर्म का अपराध खत्म नहीं होता’, शादी के बाद भी नहीं मिली राहत, कोर्ट ने सुनाई 10 साल की सजा

POCSO Act: मुजफ्फरनगर की विशेष POCSO अदालत ने स्पष्ट किया कि दुष्कर्म के बाद पीड़िता से शादी करने से अपराध खत्म नहीं होता। दोषी को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई।
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Muzaffarnagar POCSO Case, POCSO Court Verdict, Husband Gets 10 Year Jail

हर किसी को जाननी चाहिए ये कानूनी बात

Muzaffarnagar POCSO Case: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर की विशेष पॉक्सो अदालत ने दुष्कर्म के एक अहम मामले में साफ कर दिया कि अपराध करने के बाद पीड़िता से शादी कर लेना सजा से बचने का आधार नहीं हो सकता। अदालत ने सहारनपुर के देवबंद निवासी दोषी को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाते हुए कहा कि विवाह किसी भी गंभीर लैंगिक अपराध को न तो वैध बना सकता है और न ही उसकी गंभीरता कम कर सकता है।

2021 में दर्ज हुआ था मामला

यह मामला वर्ष 2021 का है। पुरकाजी थाना क्षेत्र की एक किशोरी 20 जनवरी 2021 को संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गई थी। दो दिन बाद उसके पिता ने सहारनपुर निवासी युवक और उसके पिता के खिलाफ अपहरण, दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट की धाराओं में मामला दर्ज कराया। पुलिस जांच पूरी होने के बाद केस विशेष अदालत में पहुंचा।

जमानत मिलने के बाद पीड़िता से की शादी

मुकदमे की सुनवाई के दौरान आरोपी को जमानत मिल गई। इसके बाद सितंबर 2023 में उसने पीड़िता से विवाह कर लिया। अदालत में बचाव पक्ष ने इसी शादी का हवाला देते हुए आरोपी को राहत देने की मांग की। हालांकि अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि किसी भी आपराधिक मामले का फैसला कानून, सबूत और तथ्यों के आधार पर होता है, न कि बाद में बने रिश्तों या समझौते के आधार पर।

अदालत ने क्या कहा?

विशेष न्यायाधीश मनोज कुमार सिद्धू ने अपने फैसले में कहा कि यदि ऐसे मामलों में शादी को राहत का आधार बना दिया जाए, तो इससे न्याय व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा पर लोगों का भरोसा कमजोर होगा। अदालत ने यह भी कहा कि बलात्कार केवल एक महिला के खिलाफ अपराध नहीं, बल्कि उसकी गरिमा, सम्मान और पूरे समाज के नैतिक मूल्यों पर हमला है। इसलिए ऐसे मामलों में सख्त सजा देना न्याय व्यवस्था की जिम्मेदारी है।

इन धाराओं में सुनाई गई सजा

अदालत ने दोषी को पॉक्सो एक्ट की धारा 3/4(1) के तहत 10 वर्ष के कठोर कारावास और 8 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।इसके अलावा अपहरण और अन्य संबंधित धाराओं में भी अलग-अलग सजा और जुर्माना लगाया गया। अदालत ने आदेश दिया कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। साथ ही 14 हजार रुपये का जुर्माना पीड़िता को मुआवजे के रूप में देने का भी निर्देश दिया गया।

सुनवाई के दौरान आरोपी के पिता की हो गई थी मौत

मामले में आरोपी के पिता भी नामजद थे, लेकिन सुनवाई के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। इसके बाद अदालत ने उनके खिलाफ चल रही न्यायिक कार्रवाई समाप्त कर दी।

अदालत की अहम टिप्पणी

फैसले में अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि आरोपी ने पीड़िता से शादी नहीं की होती, तब भी मुकदमा अपने कानूनी आधार पर चलता। इसलिए अपराध के बाद विवाह कर लेना किसी भी तरह से अपराध को खत्म नहीं करता और न ही दोषी को कानून से राहत दिला सकता है। इस फैसले को पॉक्सो मामलों में एक महत्वपूर्ण कानूनी संदेश माना जा रहा है, जिसमें अदालत ने साफ किया है कि गंभीर यौन अपराधों में बाद में हुआ विवाह सजा से बचने का आधार नहीं बन सकता।

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