नागौर

घटिया बजरी-सीमेंट से बन रहा है भवन, भ्रष्टाचार जोरों पर

दीवार से उतरने लगी सीमेन्ट-बजरी भी राम भरोसे

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Nov 22, 2017
bhavan
ghapla

नावां शहर. नवनिर्मित पंचायत समिति भवन का निर्माण कार्य बहुत जोर शोर से चल रहा है तथा लगभग पचास प्रतिशत से अधिक निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है। भवन निर्माण कार्य में गुणवत्ता का ध्यान बिल्कुल भी नहीं रखा जा रहा है।

पंचायत समिति के जनप्रतिनिधियों की शिकायत पर पत्रिका टीम ने निर्माणाधीन पंचायत समिति भवन पहुंचकर मामले की पूरी जानकारी की। भवन निर्माण में एक प्रतिशत भी गुणवत्ता का ध्यान नहीं दिया जा रहा है तथा घटिया सामग्री का उपयोग किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पश्चात बजरी खनन काफी कम हो गया है। जिसके पश्चात ठेकेदारों को बजरी मिलने में परेशानी होने लग गई। गुणवत्ता युक्त बजरी नहीं मिलने के चलते पंचायत समिति भवन के ठेकेदार ने हल्की व घटिया बजरी का उपयोग करना शुरू कर दिया है। जिससे निर्माण कार्य में भी घटिया निर्माण साफ दिखाई दे रहा है। जानकार ठेकेदारों ने बताया कि किसी भी इमारत में बजरी अच्छी होना आवश्यक होता है अन्यथा कार्य मजबूत नहीं होता है। यदि बजरी अच्छी होगी तो इमारत व दीवार की मजबूती दो गुना हो जाती है। ठेकेदार के कार्मिकों की ओर से निर्माण कार्य में सीमेन्ट का प्रयोग भी गलत किया जा रहा है। कांकरी व बजरी की तुलना में सीमेन्ट कम डाली जा रही है। जिससे निर्माण कार्य में मजबूती नहीं आ रही है। भवन की दीवारों पर अभी से प्लास्टर गिरने लग गया है तथा दीवारों पर केवल बजरी ही नजर आ रही है। खारे पानी का उपयोग करने के चलते दीवारों पर सीमेन्ट नहीं टिक पा रही है। जिससे दीवारों में मजबूती नहीं रही।
ढाई करोड़ में भी घटिया निर्माण

पंचायत समिति भवन निर्माण का बजट ढाई करोड़ रुपए से भी अधिक स्वीकृत हुआ। टेण्डर प्रक्रिया होने के बाद लगभग चार प्रतिशत कम में टेण्डर ठेकेदार को दे दिया गया। ठेकेदार को लगभग ढाई करोड़ में टेण्डर जारी हुआ तथा लगभग सात माह पूर्व निर्माण कार्य शुरु कर दिया गया, लेकिन पचास प्रतिशत से भी अधिक निर्माण हो गया है। गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जिम्मेदार अधिकारी भी इस पर ध्यान नहीं दे रहे है जिसके चलते ठेकेदार सरकार को नुकसान देकर अपनी जेब भर रहे है।

हल्की ईटों का हो रहा प्रयोग
पंचायत समिति भवन निर्माण कार्य में उपयोग में ली जा रही ईटों में भी माल कमाया जा रहा है। इटें इतनी हल्की गुणवत्ता की काम में ली जा रही है कि दो ईटों को आपस में टकराने से ही टुकड़े टुकड़े हो रहे है। पंचायत समिति के कुछ जनप्रतिनिधियों के सामने ईटों की मजबूती की जांच की गई। जिसमें गुणवत्ता कमजोर पाई गई।

Published on:
22 Nov 2017 10:15 pm