नागौर

मरणोपरांत के बाद दान की राशि ही साथ चलती है-महाराज

जोधपुर के महंत रामप्रसादने जसनगर में चल रही भागवत में भक्ति की ओजस्वी सरस वाणी से सभी श्रद्धालुओं को विभोर कर दिया ।

2 min read
Jan 02, 2018
bhagwat katha in jasnagar nagaur

जसनगर.जोधपुर के महंत रामप्रसादने जसनगर में चल रही भागवत में भक्ति की ओजस्वी सरस वाणी से सभी श्रद्धालुओं को विभोर कर दिया । सोमवार रात्रि को महंत ने कहा कि दान देने से धन का सदुपयोग होता है। दान से ही मनुष्य की पुनवानी बढ़ती है, वहीं परमात्मा की कृपा से लक्ष्मी की बढ़ोतरी होती है। और उसके जीवन में खुशहाली के दीप प्रज्जवलित होते है । दान -पुण्य व जरूरतमंदों की सही समय पर की गई सेवा परमार्थ का कार्य कहलाता है। उस प्राणी के आत्मा की आशीष मनुष्य का जीवन बनाने में सहायक साबित होती है। प्रत्येक मनुष्य का नैतिक दायित्व है, कि वे अपनी कमाई का कुछ भाग दान व पुनीत के कार्य में लगाना चाहिए। उन्होंने ने कहा कि मनुष्य अपने हाथो से दान, पुण्य,गरीब- जरूतमंदों की सेवा कर लेता , वही उस प्राणी के साथ कई जन्मों तक चलती है । समय पर हमारे द्वारा दिया गया दान जीवन में आने वाली रुकावटों, मुसिबतों के हर पल को दूर कर देता है । मनुष्य के जीवन में आकस्मिक दुर्घटना, विपरीत परिस्थितियां आती है, फिर भी हमारा बाल बंाका नही होता है । इसके पीछे पूर्व व इस जन्म में किए दान, पुण्य,अच्छे कार्यो से जीवन सार्थक साबित होता है । । सोमवार रात्रि को राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में चल रहे नानी बाई मायरों धार्मिक कार्यक्रम में महंत परमहंस श्री 1०8 रामप्रसाद महाराज आगमन की सूचना मिलने पर दूर दराजों के सैकड़ों भक्तों ने माल्यार्पण करके आशीर्वाद लेने की कतारें लगी ।

मायरो...

संत आत्माराम ने कहा कि भक्ति के जीवन में पग पग पर दु:खों के माध्यम से विभिन्न काम , धन्धों मे रूकावटे आती रहती है । ऐसी स्थिति में अपने ईष्ट देवता पर पूर्ण भरोसा रखे । उसे एक दिन सफलता जरूर मिलती है । इसकी कोई गारंटी नही कि भक्ति करने वाले मनुष्य के दु:ख दूर होगें । मनुष्य योनी से होता हुआ है, ऐसा 84 योनी के जन्म के दौरान के आपके हाथों से बुरे कर्मों का प्रभाव मनुष्य योनी में भक्ति से धीरे धीरे दूर होते है । भक्ति किए जाएं उसके फल की इच्छा नहीं करे । इस संसार में जितने भी भक्त हुए थे, उनके जीवन में भी विपरीत परिस्थितियां आई, उनको दु:खों को भोगने की शक्ति भक्ति से मिली ।
कथा....

भागवत कथा में गजेन्द्र अपनी पत्नी, बच्चों सहित सरोवर में जल पीने गया तो सरोवर में मगरमच्छ ने पैर पकड़ लिया । उस समय गजेन्द्र ने अपने पत्नी, बच्चों को पानी से बचाने के लिए बोला । ये विचार जसनगर में चल रही भागवत कथा में कथाकार संत आत्माराम महाराज ने व्यक्त किए। उन्होने ने कहा कि गजेन्द्र ने मन भगवान का ध्यान किया, ईश्वर ने चर्तुभुज का अवतार लेकर भक्त की रक्षा कर से बाहर निकाला । इस संसार रूपी सागार में जिस भक्त की भक्ति में शक्ति होती है, उसी की नईया पार हो पाती है । भागवत में मगंलवार को नन्द उत्सव मनाया गया । इस अवसर पर बाल कृष्ण भगवान, यशोदा, वासुदेव व जन्मोत्सव की झंाकी सजाई गई । कार्यक्रम में संत राम गिरी जैतारण,संत पुष्कर नाथ महाराज ने भजनों की प्रस्तुति दी ।

ये भी पढ़ें

नागौर की छोटी-बड़ी खबरें: कलक्टर के समक्ष गुहार, कहा: तहसीलदार के गलत निर्णय से उजड़ जाएगी उसकी दुनिया…
Published on:
02 Jan 2018 06:16 pm
Also Read
View All