
सुबह का समय, उम्मीदें थी कि आज बर्तन धोने के काम से अच्छी दिहाड़ी बन जाएगी। सुबह 25 वर्षीय छोटूराम अपनी आठ माह की गर्भवती पत्नी सुमन और बहन रेखा के साथ मजदूरी के लिए निकला था। दो साल का छोटा बेटा घर पर अकेला क्या करेगा, यह सोचकर उसे भी साथ ले गए, लेकिन अमावस का काला दिन चारों के लिए काल बनकर आया और पूरा परिवार उजड़ गया।
अनियंत्रित कार ने मारी टक्कर
नियति का भी अजब खेल है, जिस नवजात का एक महीने में जन्म होने वाला था, उसकी मां की कोख में पहले ही मौत हो गई। ना मां की जिंदगी बची, ना ही पिता की। बच्छवास-चुड़ियास गांव की सरहद में अनियंत्रित कार की चपेट में आए एक ही परिवार के चार जनों की मौत की खबर जिसने भी सुनी वो स्तब्ध रह गया। सभी को इस बात ने आहत किया कि इनमें से एक मृतका आठ माह की गर्भवती थी। अस्पताल में परिजनों का करूण क्रंदन सुनकर हर किसी का दिल पसीज गया।
दिहाड़ी थी कमाई का जरिया
मृतक छोटूराम अपने परिवार के साथ शादी समारोह सहित अन्य कार्यक्रमों में होने वाले भोज के दौरान बर्तन धोने का कार्य करता था। यही उसके परिवार की कमाई का जरिया था। रविवार सुबह भी वे घर से पत्नी, छोटे पुत्र व बहन के साथ चुई गांव में बर्तन धोने के लिए निकले थे, लेकिन वापस नहीं लौटे। इस हृदय विदारक घटना के बाद दोपहर को चुड़ियास में मृतक छोटूराम, उसकी पत्नी सुमन और दो साल के मासूम पुत्र रोहित के शव पहुंचे तो परिजन रो-रो कर बेहाल हो गए। घर से एक साथ तीन अर्थियां उठी तो लोगों की आंखों से आंसू निकल आए। एक ही चिता पर तीनों शवों का अंतिम संस्कार किया गया। जबकि रेखा सांसी का उसके सुसराल रेण में गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार किया।