
मो. अकरम
मकराना. नगरपरिषद बोर्ड का तीन वर्ष का कार्यकाल पूरा होने एवं लम्बी-चौड़ी सफाईकर्मियों की फौज पर करोड़ों रुपए के वार्षिक वेतन वृद्धि होने पर भी शहर में साफ-सफाई को लेकर चारों ओर बदहाली भी बढ़ी है। जनप्रतिनिधि एवं नगरपरिषद प्रशासन के साफ-सफाई कार्य की प्रभावी मॉनिटरिंग में उदासीनता बरतने के चलते कई स्थानों पर 7 से १५ दिनों के अंतराल से पहुंच परिषद सफाईकर्मियों के साफ-सफाई व्यवस्था की सुध लेने से जगह-जगह लगे कचरे के ढेर से लोगों का जीना मुहाल है। इसी तरह कहीं खुले सीवरेज तो कहीं क्षतिग्रस्त सीवरेज चैम्बर तो कहीं मुख्य बाजार में सडक़ के बीचोंबीच ठेले खड़े रहने तो कहीं दुकानदारों के दुकान के बाहर अतिक्रमण कर सामान फैलाने पर किसी के भी कोई कार्रवाई नहीं करने से लोग प्रतिदिन परेशान हो रहे हैं।
कमेटियों का गठन इस बोर्ड में भी नहीं
शहर में चाहे पूर्व में नगरपालिका रही हो या गत नगरपरिषद बोर्ड हो। अब तक के सभी चेयरमैन का एक ही ढर्रा रहा जिसके तहत कभी भी किसी ने भी कमेटियों का गठन नहीं किया। इस तरह इस बोर्ड में भी सभापति शौकत अली गौड़ ने सारे अधिकार अपने पास रखते हुए अब तक कमेटियों का गठन नहीं किया है।
ढर्रा वहीं
शहर में नगरपालिका के अस्तित्व में आने से लेकर इसके नगरपरिषद में क्रमोन्नत होने तक जितने भी बोर्ड बने एवं जो भी नगरपालिका/नगरपरिषद सभापति या अध्यक्ष एवं पार्षद बने है सभी की कार्यशैली कमोबेश एक जैसी होने एवं प्रशासन के भी उन्हीं का अनुसरण करने से शहर के सभी वार्डों में साफ-सफाई को लेकर चौकस निगाह नहीं होने से शहर में चारों ओर गंदगी का आलम ही रहा है ।
विकास का प्रस्ताव कौन ले
नियमानुसार दो मााह में एक साधारण सभा की बैठक का आयोजन होना चाहिए जिसके तहत बोर्ड के तीन वर्ष के कार्यकाल में १८ बैठकों का आयोजन होना था परन्तु अब तक ९ बैठक ही आयोजित हुई वहीं इस वर्ष मात्र एक बैठक गत १५ फरवरी को ही हुई थी। ऐसे में साफ-सफाई, सडक़ एवं नाली निर्माण आदि के टेण्डर जारी करने, पट्टे जारी करने में हो रही देरी से लोगों को परेशानी के मद्देनजर प्रक्रिया के सरलीकरण, सीवरेज निर्माण व कनेक्शन जारी में ठेकेदार के लापरवाही बरतने आदि से कैसे निपटा जाए। ऐसे में जब बैठकें हो ही नहीं या जो हो रही है उनमें शहर के विकास को लेकर लेकर चर्चा ही नहीं की गई तो शहरवासियों को प्रतिदिन हो रही समस्याओं से निजात कैसी मिलेगी।
वेतन बढ़ोतरी के साथ बदहाली भी बढ़ी
पूर्व में नगरपरिषद के स्थाई १५१ व ठेकेदार के ५० सफाईकर्मियों को मिलाकर इनके कुल वेतन पर ३.८५ करोड़ रुपए वार्षिक खर्च होते थे वहीं सितम्बर माह तक नगरपरिषद के १४३ व ठेकेदार के ५५ के लगभग सफाईकर्मियों के वार्षिक वेतन बढ़ते हुए ५.२८ करोड़ रुपए हो गया परन्तु करोड़ों रुपए की वेतन वृद्धि के बावजूद साफ-सफाई को लेकर बदहाली भी बढ़ी है । इसी तरह वर्तमान में सफाई को लेकर निजी ठेके का टेण्डर प्रक्रियाधीन है।
ठेकेदार की कार्यशैली भी बनी सिरदर्द का सबब
लगभग 73.25 करोड़ रुपए की लागत से शुरू हुए प्रथम फेज सीवरेज निर्माण कार्य वर्ष 2014 में पूरा होना था परन्तु आज दिन तक सीवरेज एवं सडक़ निर्माण कार्य अधूरा रहने एवं मार्ग में ऊपर उठे सीवरेज चैम्बर आवाजाही में लोगों के लिए सिरदर्द बने हुए है। ठेकेदार को 4500शौचालयों को सीवरेज कनेक्शन से जोडऩा था जिसमें से अभी तक 3300 कनेक्शन किए गए है एवं 1200 अभी भी शेष है। प्रभावी मॉनिटेरिंग के अभाव में अभी हाल ही में बनी सडक़ें भी कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त होकर टूटी हुई है।
पद खाली
परिषद के लिए स्वीकृत कुल 305 पदों में से 128पद यथा आज दिन तक अधिशासी अभियंता का पद सहित सहायक अभियंता (सिविल) के दो में से एक, कनिष्ठ अभियंता एवं स्वास्थ्य निरीक्षक दोनों के स्वीकृत चारों, लेखाकार, कनिष्ठ लेखाकार के दोनों, सफाई कर्मचारियों के 199 में से 56 सहित प्रकाश डूडी का अंयत्र स्थानांतरण हो जाने से गत महिने से आयुक्त का पद सहित अन्य कई पद भी रिक्त चल रहे है।
इनका कहना है:
कार्यभार ज्यादा होने से प्रत्येक वार्ड में सफाई कार्य की मॉनिटेरिंग नहीं हो सकती। सफाई व्यवस्था पटरी पर आए इसको लेकर प्रयासरत है।
अनिल जाटव, कार्यवाहक अयुक्त नगरपरिषद
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नगरपरिषद सभापति शौकत अली गौड़ की पत्रिका से बातचीत
पत्रिका: अब बचे हुए दो वर्षो में आपकी प्राथमिकता क्या रहेगी।
सभापति: सीवरेज का द्वितीय चरण शुरू करवाना एवं माताभर व गुणावती क्षेत्र का विकास।
पत्रिका: तीन वर्ष के कार्यकाल की उपलब्धि
सभापति: रेलवे स्टेशन के पास एवं बस स्टैण्ड क्षेत्र में सुलभ शौचालय निर्माण, थाने के पास निर्माणाधीन एवं इमाम चौक क्षेत्र में भी सुलभ शौचालय के निर्माण के लिए टेंडर निकाला हुआ है।
पत्रिका: बोर्ड के कार्यकाल के तीन वर्ष होने के पश्चात भी कमेटियों का गठन अब तक क्यों नहीं।
सभापति: (हंसते हुए प्रश्र को टाल दिया)
पत्रिका: साधारण सभा की बैठकों का आयोजन क्यों नहीं हो रहा।
सभापति: पूर्व एवं वर्तमान कार्यवाहक आयुक्त को अवगत कराया गया है, एजेण्डे के तैयार होते ही बैठक का आयोजन होगा।
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नगरपरिषद नेता प्रतिपक्ष- विक्रम सिंह चौहान
पत्रिका: अब तक का कार्यकाल कैसा रहा।
नेता प्रतिपक्ष: साधारण, कोई विकास कार्य नहीं हुआ।
पत्रिका: नेता प्रतिपक्ष के रूप में आपकी भूमिका।
नेता प्रतिपक्ष: सजगता से निर्वहन किया है।
पत्रिका: बोर्ड की बैठकें नहीं हो रही।
नेता प्रतिपक्ष: ईओ को अवगत कराया जा चुका है।
पत्रिका: बचे हुए दो वर्ष में आपकी योजना।
नेता प्रतिपक्ष: सभी पार्षदों को साथ लेकर सभी वार्डों में विकास कार्य हो इसको लेकर सभापति पर दबाव बनाया जाएगा।