दो हजार मीटर लम्बी होगी हवाई पट्टी, भू अधिग्रहण कार्य में जुटा जिला प्रशासन, सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है नागौर।
नागौर. शहरवासियों के लिए एक खुशखबरी है। सब कुछ योजना के मुताबिक रहा तो आने वाले साल में नागौर की हवाई पट्टी से बड़े विमान भी उड़ान भर सकेंगे। एक साल पहले किए गए सर्वेक्षण के बाद हवाई पट्टी विस्तार को हरी झण्डी मिलते ही प्रशासन ने विस्तार की कवायद शुरू कर दी थी। अब सरकार ने भूमि अवाप्ति को लेकर 3 करोड़ 61 लाख रुपए का बजट स्वीकृत किया है। अलग-अलग खसरों में अवाप्ति योग्य भूमि के चयन का कार्य तहसील कार्यालय स्तर पर जारी है। साथ ही गैर सरकारी संगठन व संस्था से सोशल इम्पेक्ट इवेल्यूशन के लिए अनुमति मांगी गई है।
उड़ान भरेंगे बड़े विमान
हवाई पट्टी विस्तार के संबंध में भूमि अधिग्रहण के लिए गठित कमेटी ने हवाई पट्टी के विस्तार को लेकर इस जमीन को उपयुक्त बताते हुए भूूमि अधिग्रहण के लिए रिपोर्ट सौंप दी थी। इसके बाद प्रशासन की ओर से 90 बीघा भूमि का अधिग्रहण करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सार्वजनिक निर्माण विभाग, अधिशाषी अभियंता श्रवण कुमार ने बताया कि विस्तार के दौरान हवाई पट्टी की लम्बाई 1500 मीटर से बढ़ाकर 2000 मीटर तथा चौड़ाई 30 से 45 मीटर की जाएगी। विस्तार के बाद 56 सीटर से लेकर 200 सीट वाले बड़े विमानों का परिचालन संभव हो सकेगा।
सबसे पहले उतरा था नेहरू का विमान
वर्ष 2008 के नागरिक उड्यन मंत्रालय के गजट नोटिफिकेशन में नागौर हवाई पट्टी शामिल थी लेकिन 2010 के नोटिफिकेशन में इसका नाम नहीं था। मंत्रालय ने 30 सितम्बर 2015 को जारी नोटिफिकेशन में राज्य सरकार द्वारा संचालित हवाई अड्डे एवं हवाई पट्टियों की श्रेणी में नागौर हवाई पट्टी को शामिल किया था। गौरतलब है कि 2 अक्टूबर 1959 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के नागौर आगमन पर उनका विमान उतारने के लिए जिला मुख्यालय पर बनी इस हवाई पट्टी का समय-समय पर विकास होता रहा।
बड़े शहरों से होगा जुड़ाव
हवाई पट्टी विस्तार को लेकर नवम्बर 2015 में नागौर आए नागरिक उड्यन मंत्रालय के चीफ पायलट कैप्टन केसर सिंह ने प्रशासनिक अधिकारियों से हवाई पट्टी के रन वे को अपग्रेड करने को लेकर चर्चा की थी। जोधपुर , बीकानेर व गंगानगर जिले पाकिस्तान की सीमा पर होने के कारण नागौर सामरिक दृष्टि से काफी अहम है। युद्ध जैसी विषम परिस्थितियों में नागौर भारत के लिए महत्वपूर्ण केन्द्र साबित हो सकता है। हवाई सेवा शुरू होने से नागौर सीधे बड़े शहरों से जुड़ जाएगा और यहां उद्योग धंधों को बढ़ावा मिलेगा। गौरतलब है कि पत्रिका हवाई पट्टी विस्तार का मुद्दा लगातार उठाता रहा है।
उड़ान में बाधा बड़ी इमारतें
नागौर हवाई पट्टी का रन वे छोटा होने व आसपास बड़ी इमारतों का निर्माण होने से विमान उड़ाने व उतारने में पायलट को दिक्कत का सामना करना पड़ता है। नगर परिषद की ओर से नियम विरुद्ध निमार्ण कार्य से हवाई पट्टी का अस्तित्व खतरे में पड़ गया। तत्कालीन कलक्टर राजन विशाल ने हवाई पट्टी के सामने निर्मित एक होटल निर्माण के लिए किए गए 90बी के आदेश के खिलाफ अजमेर संभागीय आयुक्त के समक्ष तहसीलदार के माध्यम से अपील करवाई। नगर परिषद की ओर से जारी पट्टों के विरुद्ध डीएलबी में सार्वजनिक निर्माण विभाग की निगरानी याचिका दायर करवाई। सभी स्तर पर मजबूती से पक्ष रखने से हवाई पट्टी विस्तार को मंजूरी मिली।