
नागौर जिले में निजी वाहनों का ‘सैलाब’
नागौर. जिले में निजी वाहनों की संख्या लगातार तेजी से बढ़ रही है और अब हालात ऐसे हो गए हैं कि कुल पंजीकृत वाहनों में 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा केवल प्राइवेट गाडिय़ों का हो गया है। यह आंकड़ा न सिर्फ परिवहन व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर करता है, बल्कि भविष्य के लिए गंभीर चुनौतियों का संकेत भी देता है।
जिला सडक़ सुरक्षा समिति की ओर से हाल ही तैयार किए गए रोड सेफ्टी एक्शन प्लान के आंकड़ों और स्थानीय पड़ताल से सामने आया है कि जिले में हर साल लगभग 25 फीसदी की दर से वाहन बढ़ रहे हैं। इसमें सबसे ज्यादा संख्या मोटरसाइकिलों और कारों की है, जबकि व्यावसायिक उपयोग में आने वाले वाहनों की हिस्सेदारी महज 8.32 प्रतिशत से 10 प्रतिशत के बीच सिमटी हुई है।
जिले में करीब 5.71 लाख वाहन हैं, जिनमें 3.70 लाख केवल मोटरसाइकिलें हैं। इसी प्रकार करीब 58 हजार कारें और जीप, करीब दो हजार ऑटो रिक्शा और इतने ही टैक्सी और केब्स, 1564 सरकारी एवं निजी बसें, 26,497 माल वाहक हल्के वाहन, 15,569 भारी माल वाहक वाहन, करीब 93 हजार ट्रेक्टर एवं कृषि वाहन हैं।
जिले में वाहनों की स्थिति
- कुल वाहनों में 90 प्रतिशत से अधिक निजी
- हर साल 25 प्रतिशत की वृद्धि
- 8.32 -10 प्रतिशत ही व्यावसायिक वाहन
- सबसे ज्यादा बढ़ोतरी दोपहिया और कारों में
क्यों बढ़ रहे हैं निजी वाहन?
- आसान बैंक लोन और फाइनेंस सुविधाएं
- बढ़ता मध्यम वर्ग और आय स्तर
- जिले में सार्वजनिक परिवहन की कमी
- निजी सुविधा और समय की बचत की चाह
यह है बड़ा कारण
निजी वाहनों की बढ़ती संख्या के पीछे सबसे बड़ा कारण सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की कमजोर स्थिति मानी जा रही है। जिले में बसों और अन्य सार्वजनिक साधनों की कमी तथा उनकी अनियमितता के कारण लोग निजी वाहन खरीदने को मजबूर हैं। आसान ऋण योजनाओं ने भी इस प्रवृत्ति को और बढ़ावा दिया है।
बढ़ते वाहनों के दुष्प्रभाव
- शहर में लगातार ट्रैफिक जाम
- पार्किंग के लिए जगह का अभाव
- वायु प्रदूषण में तेजी से इजाफा
- सडक़ हादसों का बढ़ता खतरा
बड़ा दुष्परिणाम :
हालांकि, इसका सीधा असर शहर की यातायात व्यवस्था पर दिखाई दे रहा है। मुख्य बाजारों और चौराहों पर बेतरतीब तरीके से खड़े होने वाले वाहनों से जाम की स्थिति आम हो गई है। पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण वाहन सडक़ों पर ही खड़े किए जा रहे हैं, जिससे पैदल चलने वालों और आपातकालीन सेवाओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। वहीं, बढ़ते वाहनों के चलते वायु प्रदूषण भी एक बड़ी चिंता बनकर उभरा है। विशेषज्ञों के अनुसार प्रदूषित हवा में सांस लेने से सांस की बीमारियां, हृदय रोग और स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्याएं बढ़ रही हैं।
समाधान की राह
- सार्वजनिक परिवहन को मजबूत और सुलभ बनाना
- कार पूलिंग और साझा परिवहन को बढ़ावा
- साइकिल ट्रैक और पैदल मार्ग विकसित करना
- ट्रैफिक नियमों का सख्ती से पालन
- पार्किंग की व्यवस्थित योजना तैयार करना
एक्सपर्ट व्यू : अभी से ध्यान देना होगा
वाहनों की बढ़ती संख्या को देखते हुए सरकारी एवं निजी कार्यालयों, कॉम्पलेक्स, बाजारों आदि में पार्किंग की व्यवस्था पर फोकस करना होगा। इसके साथ सार्वजनिक एवं पब्लिक ट्रांसपोर्ट के अच्छे और सुगम साधन उपलब्ध करवाने होंगे। प्रशासन और आमजन दोनों को मिलकर टिकाऊ परिवहन विकल्पों को अपनाने की दिशा में काम करना होगा, तभी इस बढ़ते वाहन दबाव से राहत मिल पाएगी।
- अवधेश चौधरी, जिला परिवहन अधिकारी, नागौर
Published on:
30 Apr 2026 11:18 am
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