बिना अधिकारियों के चल रहा डिस्कॉम, एक्सईएन व एईएन ने नहीं किया ज्वाइन
नागौर. इन दिनों शहर में बिजली व्यवस्था भगवान भरोसे है। डिस्कॉम में जिम्मेदार अधिकारियों ने ज्वाइन नहीं किया वहीं मौजदा कनिष्ठ अभियंता स्तरीय अधिकारी खुद को 'असहायÓ महसूस कर रहे हैं। आलम यह है कि फॉल्ट ठीक करने की व्यवस्था विभाग से लेकर निजी कंपनी को ठेके पर देने के बाद से स्थिति बिगड़ती जा रही है। फॉल्ट रिमूवल टीम (एफआरटी)टीम सूचना के घंटों बाद मौके पर नहीं पहुंचती और पहुंच भी जाए तो ठेके पर कार्यरत व्यक्ति फॉल्ट नहीं निकाल पाते। जून के महीने में तेज गर्मी बैरन बनी हुई है ऊपर से शहरी व ग्रामीण क्षेत्र में बिजली कटौती कोढ में खाज का काम कर रही है।
साल भर चलता है रख-रखाव
डिस्कॉम अधिकारी कई बार बिजली की लाइनों व जीएसएस के रख-रखाव के नाम पर बिजली कटौती करते हैं, लेकिन यह सिलसिला साल भर चलता ही रहता है। गर्मी के दिनों में लाइनों में जरुरत से ज्यादा कनेक्शन होने के कारण लोड बढने से लाइन फॉल्ट हो जाती है, लेकिन अवैध कनेक्शन ढूंढकर कार्रवाई के बजाय अधिकारी रख-रखाव को ही बिजली कटौती का हथियार बना रहे हैं। आलम यह है कि जिला मुख्यालय पर अधीषण अभियंता व सहायक अभियंता के स्थानांतरण के बाद शहर को नए अधिकारी तक नहीं मिले है। मौजूदा अधिकारियों की कार्य प्रणाली से ऐसा लगता है मानो उन्होंने बेपटरी हो रही बिजली व्यवस्था के आगे हथियार डाल दिए हों।
कलक्टर भी जता चुके नाराजगी
गर्मी व उमस से परेशान बीमार बच्चों व लोगों की तकलीफ से डिस्कॉम अधिकारियों को कोई सरोकार नहीं है। टोल फ्री नम्बर व स्थानीय फॉल्ट कंट्रोल (240812) नम्बर पर शिकायत दर्ज करवाने के बाद भी अधिकारी समस्या का समाधान नहीं कर पा रहे हैं। शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में उपभोक्ता दिन में कई बार ट्रिपंग की समस्या से दो चार हो रहे हैं, बावजूद इसके डिस्कॉम के जिम्मेदार यह नहीं बता पाते कि बिजली कटौती की समस्या से कब निजात मिलेगी। गौरतलब है कि जिला कलक्टर कुमारपाल गौतम ने भी जिला स्तरीय बैठक में डिस्कॉम की बिगड़ी विद्युत व्यवस्था पर नाराजगी जताते हुए एसएमएस से बिजली कटौती की सूचना उपभोक्ताओं तक पहुंचाने की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं।