नागौर

Good News : राजस्थान की ‘नागौरी पान मेथी’ को मिलेगी अंतरराष्ट्रीय पहचान, केंद्र सरकार ने दी ये बड़ी खुशखबरी

राजस्थान की कृषि विरासत और किसानों के लिए एक गौरवशाली खबर सामने आई है। अपनी विशिष्ट खुशबू और औषधीय गुणों के लिए दुनिया भर में मशहूर 'नागौरी पान मेथी' अब वैश्विक पहचान मिलने की कगार पर है।
2 min read
• •
Updated: 27 Feb 2026, 3:36 PM IST
Feature image

नागौर जिले की पहचान और जायके की जान 'नागौरी पान मेथी' अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग ब्रांड वैल्यू बनाने को तैयार है। लंबे समय से चल रहे प्रयासों के बाद, अब वह समय आ गया है जब इस पारंपरिक उपज को 'जीआई टैग' का कानूनी संरक्षण मिलेगा। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के पत्र के अनुसार, आवेदन का मूल्यांकन सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है और अब इसे औपचारिक रूप से GI जर्नल में प्रकाशित किया जाएगा।


मंत्री गोयल ने सांसद बेनीवाल को दी अपडेट

क्या है 'GI टैग' और नागौर के लिए यह क्यों है खास?

भौगोलिक संकेतक (GI Tag) मुख्य रूप से एक प्रमाण पत्र है, जो यह सुनिश्चित करता है कि एक विशेष उत्पाद केवल एक निश्चित भौगोलिक क्षेत्र (जैसे नागौर) में ही पैदा होता है और उसके गुण अद्वितीय हैं।

  • अद्वितीय पहचान: नागौरी मेथी अपनी विशेष 'कस्तूरी' महक के कारण अन्य क्षेत्रों की मेथी से अलग होती है।
  • कानूनी सुरक्षा: जीआई टैग मिलने के बाद कोई अन्य क्षेत्र 'नागौरी पान मेथी' के नाम से उत्पाद नहीं बेच पाएगा। इससे मिलावट और नकली ब्रांडिंग पर लगाम लगेगी।

किसानों के लिए 'वरदान': निर्यात और बाजार के खुलेंगे द्वार

नागौर जिले के हजारों किसान परिवारों के लिए यह फैसला आर्थिक क्रांति लाने वाला साबित होगा।

  • उचित मूल्य: ब्रांडिंग मजबूत होने से किसानों को उनकी फसल का वर्तमान भाव से बेहतर दाम मिलेगा।
  • वैश्विक मांग: यूरोपीय और खाड़ी देशों में नागौरी पान मेथी की भारी मांग है। जीआई टैग मिलने से 'एक्सपोर्ट' की प्रक्रिया आसान होगी और अंतरराष्ट्रीय खरीदार सीधे किसानों से जुड़ सकेंगे।
  • कृषि अर्थव्यवस्था: नागौर की स्थानीय अर्थव्यवस्था को इससे भारी मजबूती मिलेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

'कस्तूरी मेथी' की महक: नागौर की मिट्टी का जादू

नागौर की जलवायु और रेतीली मिट्टी इस मेथी को वह विशिष्ट कड़वाहट और महक देती है, जो दुनिया में कहीं और नहीं मिलती। इसे 'कस्तूरी मेथी' भी कहा जाता है। सूखे पत्तों के रूप में इसका उपयोग भारतीय रसोई के साथ-साथ आयुर्वेदिक दवाओं और सौंदर्य प्रसाधनों में भी किया जाता है।

प्रक्रिया अब अंतिम चरण में: क्या होगा अगला कदम?

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के पत्र के मुताबिक, मूल्यांकन प्रक्रिया के बाद अब इसे 'GI जर्नल' में प्रकाशित किया जाएगा। इसके बाद एक निश्चित अवधि (आमतौर पर 3 से 4 महीने) के लिए सार्वजनिक आपत्तियां आमंत्रित की जाती हैं। यदि कोई ठोस आपत्ति नहीं आती है, तो नागौरी पान मेथी को आधिकारिक रूप से जीआई टैग का प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाएगा।

जनप्रतिनिधियों और किसानों के साझा प्रयासों की जीत

यह सफलता नागौर के किसानों, कृषि विशेषज्ञों और जनप्रतिनिधियों के उन लगातार प्रयासों का परिणाम है, जो पिछले कई वर्षों से इस मांग को लेकर दिल्ली के गलियारों में दस्तक दे रहे थे। यह राजस्थान की कृषि और विरासत के संरक्षण की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है।

Updated on:
27 Feb 2026, 3:36 PM IST
Published on: