न तो बछड़ों के परिवहन पर रोक हटी, न नागौर-अजमेर हाई-वे का काम पूरा हुआ, दलहन का आयात करने से व्यापारियों की भी कमर टूटी, नहरी योजना के प्रथम चरण का काम भी अधूरा
नागौर. कई जख्म आज भी नागौर वासियों को दर्द दे रहे हैं। सरकार भले ही अपनी उपलब्धियां गिनाकर अपने जश्न में जनता को शरीक करने का प्रयास कर रही है, लेकिन चार साल से अधूरे पड़े कई कार्य , परिवहन पर रोक के चलते बर्बाद होती गोवंश की नागौरी नस्ल, दिनों-दिन बढ़ती बेरोजगारों की भीड़, गिनी-चुनी सरकारी कॉलेज होने के बावजूद आधे से ज्यादा खाली पड़े व्याख्याताओं के पद लोगों को सरकारी की बनावटी खुशी में शामिल होने से रोक रहे हैं। प्रदेश में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं, राज्य सरकार को दुबारा सत्ता में आने की जितनी चिंता है, उससे कहीं ज्यादा केन्द्र में बैठे नेताओं को है। इसकी वजह भी साफ है कि राजस्थान के साथ मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़ में भी विधानसभा के चुनाव होने हैं और इन चुनावों से ही अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव की नींव तैयार होगी। केन्द्र सरकार के चिंतित होने का दूसरा बड़ा कारण कर्नाटक का 'नाटकÓ भी है। कांग्रेस एवं विपक्षी दलों ने जिस प्रकार एकजुट होकर भाजपा को पटखनी दी है, उससे भाजपा की नींद भी पूरी तरह उड़ गई है। यही वजह है कि केन्द्र सरकार अपने चार साल के कार्यकाल पर जनता के बीच जाकर अधिक से अधिक उपलब्धियां गिनाई जा रही हैं, नागौर में भी यही किया गया। लेकिन कुछ मुद्दे ऐसे हैं जो नासूर बने हुए हैं।
बछड़ों के परिवहन पर रोक
राज्य में जब से भाजपा ने सत्ता की बागडोर संभाली है, मंत्री एवं विधायक नागौर के किसानों के सामने बछड़ों के परिवहन पर लगी रोक हटवाने की बात करते हैं, लेकिन साढ़े चार साल के कार्यकाल में कमेटी ने प्रस्ताव राष्ट्रपति को भेजने के अलावा कुछ नहीं किया। जबकि हकीकत यह है कि बछड़ों के परिवहन पर रोक हाईकोर्ट ने लगाई है, जिसके विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की आवश्यकता है।
नागौर अजमेर हाई-वे का काम अधूरा
राष्ट्रीय राजमार्ग-89 के अजमेर-नागौर सेक्शन का काम पिछले तीन साल से अधूरा पड़ा है। जिले से जुड़े मंत्रियों एवं विधायकों के सामने जब भी मुद्दा रखा जाता है, एक ही जवाब मिलता है कि ठेकेदार का ठेका निरस्त करने की कार्रवाई चल रही है। ईनाणा, मूण्डवा, भडाणा सहित बाड़ी घाटी का काम अधूरा होने से एक ओर जहां आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं, वहीं वाहन चालकों को परेशानियों का सामना करते हुए भी कुचेरा व मेड़ता के पास टोल चुकाना पड़ता है।
जोधपुर-बीकानेर बायपास का काम बंद
अजमेर-नागौर सेक्शन का काम करने वाली कम्पनी जीवीआर ने जिले का एक और महत्वपूर्ण काम अटका दिया है। नागौर शहर से भारी वाहनों को डायवर्ड करने के लिए जोधपुर रोड से बीकानेर ? रोड को मिलाने वाले बायपास का काम भी पिछले करीब तीन साल से बंद है। यदि समय पर यह काम हो जाता तो शहरवासियों के साथ वाहन चालकों को भी परेशानी नहीं होती।
हैण्डटूल्स उद्योग की उपेक्षा
देशभर में प्रसिद्ध नागौर के हैण्डटूल्स उद्योग को बढ़ावा देने का दावा करने वाली सरकार ने थोथी घोषणाएं ही की। सरकार की नीयत देखकर अधिकारी भी कुंभकर्णी नींद में हैं, करोड़ों की मशीनरी धूल फांक रही है, लेकिन जिला मुख्यालय पर हैण्डटूल्स उद्योग में लगे कारीगरों को न तो प्रोत्साहन दिया गया और न ही प्रशिक्षण दिया जा रहा है। नतीजन नागौर का हैण्डटूल्स उद्योग प्रतिस्पर्धा में पिछड़ रहा है।
मेडिकल कॉलेज का सपना अधूरा
नागौर जिला मुख्यालय पर मेडिकल कॉलेज खोलने का सपना आज भी अधूरा है। जेएलएन जिला मुख्यालय का अस्पताल होने के बावजूद चिकित्सकों के आधे से ज्यादा पद रिक्त पड़े हैं। संसाधनों की कमी से जूझ रहे डॉक्टर समय से पहले सेवानिवृत्ति लेकर घर बैठ रहे हैं। मुख्यमंत्री के आदेश के बावजूद जिला अस्पताल में सर्जन की सेवाएं नहीं मिल रही हैं।