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नागौर. राज्य सरकार ने प्रदेश को हराभरा बनाने के लिए पिछले सात-आठ वर्षों में 2200 करोड़ से अधिक रुपए खर्च कर दिए, लेकिन प्रदेश की धरती तो हरी नहीं हुई, अधिकारियों की जेबों में हरियाली जरूर छा गई। नागौर जिले की बात करें तो स्थिति और अधिक खराब है, यहां वर्ष 2010-11 से दिसम्बर 2016 तक 24.06 करोड़ से अधिक रुपए हरियाली के नाम पर खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन वन आच्छादित क्षेत्र रेगिस्तानी जिले बाड़मेर व जैसलमेर की तुलना में आधे से भी कम है।
क्षेत्रफल की दृष्टि से देखें तो नागौर राजस्थान का चौथा सबसे बड़ा जिला है, लेकिन वन क्षेत्र की दृष्टि से चूरू (73.73 वर्ग किमी) व हनुमानगढ़ (239.46 वर्ग किमी) के बाद सबसे कम नागौर का (242.40 वर्ग किमी) वन क्षेत्र है। क्षेत्रफल की दृष्टि से टोंक प्रदेश का 20वां जिला है, जिसका क्षेत्रफल 7 हजार 194 वर्ग किलोमीटर है, लेकिन टोंक का वन क्षेत्र 335.97 वर्ग किमी में है। जबकि नागौर का क्षेत्रफल 17 हजार 718 वर्ग किमी है, लेकिन यहां वन क्षेत्र 242.40 वर्ग किमी ही है।
एक्सपर्ट व्यू
सरकारी नियम बन रहे बाधक
सरकार द्वारा दिए जाने वाले करोड़ों रुपए के बजट के बावजूद वन आच्छादित क्षेत्र के क्षेत्रफल में वृद्धि नहीं होने के पीछे बड़ा कारण सरकारी नियम है। एक बार पौधे लगाने के बाद उसे पानी पिलाने का प्रावधान नहीं होने से ज्यादातर पौधे नष्ट हो जाते हैं। पश्चिमी राजस्थान में पिछले कुछ वर्षों से दीमक ने बड़ा रूप लिया है, लेकिन बिना पानी के पौधों को दवा भी नहीं दी जा सकती है। इसके साथ पूरे प्रदेश में एक जैसे नियम हैं, जबकि जलवायु व भौगोलिक क्षेत्र अलग-अलग होने से पूर्व राजस्थान के नियम पश्चिमी राजस्थान में लागू नहीं हो सकते।
करमाराम काला, सेवानिवृत्त आईएफएस, नागौर
वन विभाग के अधिकारी उदासीन
दरअसल, राज्य सरकार द्वारा पौधरोपण एवं वन क्षेत्र का वजूद बनाए रखने के लिए हर वर्ष जिलों को दिए जाने बजट से हजारों पौधे तो लगाए जाते हैं, लेकिन एक बार पौधे लगाने के बाद उनकी सार-संभाल नहीं होती और न ही उन्हें पानी दिया जाता है, जिससे पौधे जलकर नष्ट हो जाते हैं। सरकारी सिस्टम की खामी के साथ अधिकारियों एवं कर्मचारियों की उदासीनता के चलते धरती हरी नहीं हो
रही है।
सैकड़ों पद खाली, कैसे बढ़े वन क्षेत्र
प्रदेश के वन विभाग में अधिकारी एवं कर्मचारी वर्ग में सैकड़ों पद रिक्त पड़े हैं। नागौर के खींवसर विधायक हनुमान बेनीवाल द्वारा विधानसभा में मांगी गई जानकारी में यह सामने आया कि वन विभाग में राजपत्रित अधिकारी वर्ग में मुख्य वन संरक्षक के 29 में से 15 पद रिक्त हैं। इसी प्रकार वन संरक्षक के 19 में से 8, उप वन संरक्षक के 211 में से 112, सहायक वन संरक्षक के 268 में से 129 तथा लेखाधिकारी के 10 में 8 पद रिक्त हैं। राजपत्रिक अधिकारियों के कुल 679 पदों में से 319 पद रिक्त हैं। यही स्थिति अधिनस्थ संवर्ग की है। इसमें क्षेत्रीय वन अधिकारी ग्रेड प्रथम के 258 में से 201 पद तथा ग्रेड द्वितीय के 451 में से 112 पद रिक्त हैं। वनरक्षक के 4467 में से 777 पद तथा अधिनस्थ संवर्ग के कुल 8405 में से 1796 पद रिक्त हैं।
Published on:
05 Jun 2018 11:25 am
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