Rajasthan News : बेटे को परिवार का सहारा बनते देख माता-पिता की आंखों में चमक आ जाती है, लेकिन समय जब पलटता है तो सब कुछ बदल देता है। आज एक मजदूर की दर्द भरी कहानी जानकर आपका दिल भी भावुकता से पिघल जाएगा।
Nagaur News : कहते हैं माता पिता जब अपने बेटे की मजदूरी के रुपए अपने हाथ में लेते है तो वह दिन उनके लिए बड़ी खुशी देने वाला होता है। बेटे को परिवार का सहारा बनते देख माता-पिता की आंखों में चमक आ जाती है, लेकिन समय जब पलटता है तो सब कुछ बदल देता है।
ऐसी ही घटना हुई है कस्बे के राजपुरा मार्ग के रेलवे अंडर ब्रिज के पास बनी एक ढाणी में रहने वाले छोगाराम मेघवाल के साथ। उसके पुत्र गणपत मेघवाल पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
गरीब परिवार का 21 वर्षीय गणपत मेघवाल अपने पिता का सहारा बनने के लिए हैदराबाद में मजदूरी करने गया था। गणपत वहां पत्थर का काम करने लगा। उसका कामकाज वहां ठीक चल रहा था। परिवार गरीबी से ऊंचा उठने लगा था। लेकिन भगवान को कुछ और ही मंजूर था। गत दो माह पहले वह पत्थर कटिंग कर रहा था।
अचानक मशीन उसकी कमर पर आ गिरी और रीढ़ की हड्डी में फ्रेक्चर हो गया। उसका अस्पताल में उपचार करवाया गया, लेकिन वह ठीक नहीं हुआ तो परिजन उसे सीकर ले गए। दो माह तक परिवार वाले उसे चलाने के लिए चिकित्सकों की सलाह लेते रहे। लेकिन इलाज कारगर नहीं हो सका। उपचार में पिता छोगाराम आर्थिक रूप से टूट गए हैं।
गणपत ने बताया कि पिता खनन कार्य करते थे। परिवार की स्थिति काफी खराब थी। बहन- भाई और वह बड़े हुए थे शादी करनी थी। पिता के पास पैसा नहीं था तो उन्हें सहारा देने के लिए मजदूरी करने हैदाराबाद गया था। मुझे नहीं पता था कि एक वर्ष बाद मेरी जिन्दगी इस तरह बदलेगी। आज वह हर किसी से उसका इलाज करवाने की फरयाद करता है।
मशीन की चोट से गणपत की रीढ़ की हड्डी टूट गई है। इससे पेट के नीचे का हिस्सा काम नहीं करता है। वह चारपाई पर पड़ा समय गुजार रहा है। वह आंत्र असंयम बीमारी से जूझ रहा है। वह आंतों पर नियंत्रण करने में असमर्थ है। शरीर सिर्फ एक कपड़े से ढका रहता है। उसकी यह दशा देखकर हर कोई भावुक हो जाता है। माता पिता का जवान बेटे की यह दशा देखकर रो रोकर बुरा हाल है।