
नागौर. शहर में पेयजलापूर्ति लाइन में लीकेज से रोजाना हजारों-लाखों लीटर अमृत व्यर्थ बह रहा है। शहर के अलग-अलग वार्डों में पेयजलापूर्ति लाइन में सैकड़ों छोटे-बड़े लीकेज है। जिम्मेदारों की लापरवाही व आम लोगों की उदासीनता का खमियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है। ऐसा ही एक मामला गूंगसा की गली में सामने आया है, जहां भूमिगत जल के रिसाव के चलते मंदिर की नीवों में पानी जाने से दीवारों में दरारें आ गई। यह अलग बात है कि जल रिसाव वाले स्थानों पर जिम्मेदारों की नजर नहीं पड़ती। मकान धंसने से हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
पहले भी हो चुके हादसे
गूंगसा की गली में जलदाय विभाग की पाइप लाइन मेें रिसाव के कारण लक्ष्मी नारायण मंदिर में कई जगह दरारें आ गई है। मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष विजय गोपाल पुरोहित ने बताया कि ट्रस्ट की ओर से खुदाई करवाने पर पता चला कि पेयजलापूर्ति लाइन टूटी हुई है। भूमिगत रिसाव से मंदिर को भारी क्षति पहुंची है। मंदिर ट्रस्ट और मौहल्ले के लोगों ने जल रिसाव से हो रहे नुकसान को लेकर जलदाय विभाग के अधिकारियों को दूरभाष पर सूचित किया है। इससे पहले कायस्थ मोहल्ला, बालसमंद, बाजरवाड़ा, बस्सी मोहल्ला क्षेत्र में भी रिसाव से मकानों को क्षति पहुंची थी।
लीकेज के नाम पर औपचारिकता
नगर परिषद की शहरी जल प्रदाय योजना में लीकेज ठीक करने के लिए ठेका दिया जाता है लेकिन ठेकेदार के आदमी लीकेज सुधारने के नाम पर केवल औपचारिकता करते हैं। लीकेज वाले स्थान पर नियमानुसार नट बोल्ट लगाने के बजाय साईकिल के पुराने ट्यूब लपेटकर औपचारिकता करने से कुछ समय बाद पानी की लाइन पर ऊपर से दबाव पडऩे तो कभी पानी के प्रेशर के कारण उस जगह पर फिर से लीकेज हो जाता है। अधिकारी भी बिना भौतिक सत्यापन किए ठेकेदारों को लाखों रुपए का भुगतान कर देते हैं।