-राजस्थान के नागौर में अतिक्रमण मामले में नगर परिषद की अलग-अलग रिपोर्ट, 43 माह से अतिक्रमण हटाने के लिए चक्कर काट रहा परिवादी..
नागौर. शहर के कुम्हारवाड़ा क्षेत्र में कथित रूप से सरकारी जमीन पर दुकान के सामने बनाई गई चबूतरी को हटाने के लिए 43 माह बाद भी कार्रवाई नहीं हुई। यह स्थिति तब है जब जिला स्तरीय जनसुनवाई में प्रकरण सुनने के बाद कलक्टर ने Nagaur नगर परिषद आयुक्त को अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए थे। इससे अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अतिक्रमण हटाने को लेकर शहरी सरकार कितनी गंभीर है। नगर परिषद ने पहले अतिक्रमण मानते हुए आधा-अधूरा अतिक्रमण हटाया लेकिन दुबारा अतिक्रमण होने पर नगर परिषद कार्मिकों ने रिपोर्ट में इस जमीन को खरीदशुदा बताते हुए पुरानी रिपोर्ट को ही बदल दिया।
सूचना के बावजूद अनजान
कुम्हारवाड़ा निवासी पीडि़त मोजीराम ने 19 सितम्बर 2014, 17 अक्टूबर 2016, 19 दिसम्बर 2017, 05 जनवरी 2018 व 22 जनवरी 2018 एवं 7 जून 2018 को नगर परिषद में अतिक्रमण हटाने को लेकर शिकायत की। इसी बीच शिकायत सम्पर्क पोर्टल पर दर्ज होने व प्रकरण जिला स्तरीय जन सुनवाई में दर्ज होने पर जिला कलक्टर कुमारपाल गौतम ने 8 मार्च 2018 को नगर परिषद आयुक्त को कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इस पर आयुक्त स्वच्छता निरीक्षक ने 16 मार्च को अतिक्रमण हटाकर पालना रिपोर्ट पेश कर दी, लेकिन अगले ही दिन अतिक्रमी ने फिर से चबूतरी निर्माण कर अतिक्रमण कर लिया। जिसकी जानकारी आयुक्त, स्वच्छता निरीक्षक को दी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
नए सिरे से हो निष्पक्ष जांच
पीडि़त का कहना है कि नगर परिषद के जांच अधिकारियों ने 14 फरवरी 2018 की रिपोर्ट में नगर परिषद में राशि जमा करवाकर निर्माण कार्य किया जाना बताया है, लेकिन रिपोर्ट में निर्माण कार्य की अनुमति की पत्रावली संख्या व तिथि का जिक्र नहीं किया गया है। यहां तक कि पीडि़त द्वारा मांगने पर आधी-अधूरी जानकारी उपलब्ध करवाई गई। जबकि एटीपी की ओर से पत्रावली को तीन महीने तक अपने पास रोके रखा गया व 10 मई 2018 को पेश रिपोर्ट में भूमि खरीदशुदा लेकिन किसी प्रकार का पट्टा नहीं होना बताया गया। एटीपी की रिपोर्ट में भी परिवादी की ओर से बंटवारा समेत अन्य 4 सबूतों की अनदेखी की गई है। परिवादी ने एटीपी व स्वच्छता निरीक्षक की ओर से पेश रिपोर्ट की नए सिरे से निष्पक्ष जांच करवाने की मांग की है।