
नागौर. करीब 15 करोड़ रुपए की लागत से बना मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य इकाई (एमसीएच विंग) का भवन महज छह साल में जर्जर होकर कंडम घोषित हो गया, लेकिन इससे जुड़े जिम्मेदार अधिकारियों और निर्माण एजेंसी पर 33 माह बाद भी कार्रवाई नहीं हुई। इस एमसीएच विंग को मई 2017 में हैंडओवर किया गया था। निर्माण की गुणवत्ता को लेकर शुरुआत से ही सवाल उठते रहे। तत्कालीन जिला कलक्टर कुमारपाल गौतम ने मामले की एसीबी से जांच भी करवाई थी। कमेटियां गठित हुई, विशेषज्ञों से तकनीकी जांच कराई गई और रिपोर्ट के आधार पर भवन को असुरक्षित मानकर खाली भी कराया गया, लेकिन दोषियों पर कार्रवाई का मामला अब तक फाइलों में ही अटका है। इस बीच जर्जर भवन जेएलएन राजकीय चिकित्सालय परिसर में आने वाले मरीजों, परिजन व स्टाफ के लिए खतरा बना हुआ है।
दिसंबर 2023 में भवन की तकनीकी जांच जोधपुर स्थित एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज की विशेषज्ञ टीम से कराई गई। इसके लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) ने 5.31 लाख रुपए शुल्क का भुगतान किया। विशेषज्ञों ने भवन को पूरी तरह असुरक्षित बताते हुए इसे मरम्मत योग्य नहीं माना। इसके बाद मरीजों-अस्पताल स्टाफ की सुरक्षा को देखते हुए भवन खाली करा दिया गया।
भवन निर्माण में अनियमितताओं की जांच के लिए एनएचएम के तत्कालीन मिशन निदेशक डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी ने 18 दिसंबर 2023 को जांच के आदेश दिए थे। इसके बाद 27 दिसंबर को अतिरिक्त निदेशक चिकित्सा प्रशासन ने चार सदस्यीय कमेटी गठित कर तीन दिन में रिपोर्ट मांगी थी। कमेटी को बजट, निर्माण एजेंसी, भुगतान, अधिकारियों के सुपरविजन, गुणवत्ता निगरानी और दोषी एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई समेत छह बिंदुओं पर जांच करनी थी। विडंबना यह है कि जिस मामले में तीन दिन में रिपोर्ट मांगी गई थी, उसमें 33 माह बीतने के बाद भी जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई।
एमसीएच विंग के भवन निर्माण में बरती गई अनियमितता को लेकर जयपुर स्तर से संबंधित अधिकारियों व ठेकेदार के खिलाफ एफआइआर दर्ज करवाई गई है। ज्यादा जानकारी जयपुर के अधिकारी ही दे पाएंगे।
- नितिन कालावत, एईएन, एनएचएम, नागौर कार्यालय