नागौर जिले की सुखवासी गांव में जन्मे हिम्मताराम भाम्भू ( Environment Lover Himmataram Bhambhu ) को पर्यावरण संरक्षण, वन्य जीवों की रक्षा एवं पशु क्रूरता के खिलाफ लम्बे समय तक किए गए संघर्ष एवं कार्यों को देखते हुए केन्द्र सरकार के गृह मंत्रालय ने उन्हें पदम श्री पुरस्कार ( padamshri awardee ) देने की घोषणा की है।
नागौर.
नागौर जिले की सुखवासी गांव में जन्मे हिम्मताराम भाम्भू ( Environment Lover Himmataram Bhambhu ) को पर्यावरण संरक्षण, वन्य जीवों की रक्षा एवं पशु क्रूरता के खिलाफ लम्बे समय तक किए गए संघर्ष एवं कार्यों को देखते हुए केन्द्र सरकार के गृह मंत्रालय ने उन्हें पदम श्री पुरस्कार ( padamshri awardee ) देने की घोषणा की है। पर्यावरण प्रेमी भाम्भू को गत दिनों राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द से मुलाकात कर उनके द्वारा किए गए कार्यों एवं आगामी कार्ययोजना को लेकर चर्चा की थी।
11 हजार पौधे लगाकर जंगल का रूप दिया ( Environment protection )
पर्यावरण प्रेमी हिम्मताराम भाम्भू प्रदेश-देश में सरकार एवं कई संस्थाओं से सम्मानित हो चुके हैं, जिन्होंने न केवल पिछले 30 वर्षों में 5 लाख से अधिक पौधे लगाए, बल्कि उनके द्वारा लगाए गए साढ़े तीन लाख पौधे आज पेड़ बन चुके हैं। भाम्भू ने नागौर के निकट हरिमा गांव के पास 25 बीघा जमीन लेकर पर 11 हजार पौधे लगाकर जंगल का रूप दिया है। ताकि लोगों को पर्यावरण का महत्व बता सकें। भाम्भू ने यहां पर्यावरण प्रदर्शनी भी बना रखी है।
वन्य जीवों के लिए खुद लड़ते हैं मुकदमे
भाम्भू पर्यावरण संरक्षण के साथ वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए भी हर वक्त तैयार रहते हैं। वन विभाग से ज्यादा सक्रिय रहकर शिकारियों के खिलाफ लड़ाई लड़ते हैं और कोर्ट में मुकदमे भी खुद के खर्चे से लड़ते हैं। कई बार वन विभाग कार्रवाई से पीछे हट जाता है, लेकिन भाम्भू डटकर मुकाबला करते हैं।
भाम्भू ने बताया कि उनके द्वारा मूक पशु-पक्षियों की सुरक्षा एवं पर्यावरण के क्षेत्र में जो काम किया, उसका प्रतिफल उन्हें आज मिला है। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को सामाजिक सरोकार व पर्यावरण के क्षेत्र में आगे आने का आह्वान किया है।
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