नागौर

स्वच्छता सर्वेक्षण को लेकर तैयारियां तेज, क्षेत्रीय उप निदेशक शर्मा ने ली अधिकारियों की बैठक

नगर परिषद क्षेत्र को स्वच्छ बनाने में मददगार साबित हो सकता है स्वच्छता एप] स्वच्छता सर्वेक्षण 2018 की तैयारियां तेज, नगर परिषद करेगी आम जन को जागरूक।

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Dec 25, 2017
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नागौर. स्वच्छता एप नगर परिषद क्षेत्र को स्वच्छ बनाने में मददगार साबित हो सकता है। जागरूक शहरवासी, विद्यार्थी इस एप का उपयोग कर स्वच्छता सर्वे में शहर की रैंकिंग सुधार में अपनी जिम्मेदारी निभा सकते हैं। लोगोंं की जागरुकता से नागौर देशभर में स्वच्छता में अग्रणी शहरों की श्रेणी में आ सकता है। स्थानीय निकाय विभाग, अजमेर के क्षेत्रीय उप निदेशक किशोर कुमार शर्मा ने शनिवार को नगर परिषद सभागार में आयोजित स्वच्छता सर्वे कार्यशाला में यह बात कही। उन्होंने कहा कि लोगों को स्वच्छता एप डाउन लोड कर इसका उपयोग करने की जानकारी उचित माध्यम से दी जाए।
बायो मेट्रिक से हो उपस्थिति
उन्होंने जिले की सभी नगर परिषद व नगर पालिकाओं में स्वच्छता एप डाउनलोड करवाने, कचरा परिवहन, घर-घर कचरा संग्रहण, एमजेएसए में पौधरोपण, स्वच्छता कमेटियों का गठन, प्रचार-प्रसार, कचरा परिवहन टिपर में जीपीएस व बायो मेट्रिक से उपस्थिति आदि के बारे में जानकारी ली। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना में निकायों में स्थिति की समीक्षा की। नगर पालिकाओं के अधिशाषी अधिकारियों ने पालिकावार जानकारी दी। मेड़ता व नागौर नगर परिषद आयुक्त श्रवण चौधरी ने परिषद स्तर पर किए जा रहे कार्यों के बारे बताया।
सर्वे में होगा अंकों का निर्धारण
नगर परिषद सचिव नरेन्द्र बापेडिय़ा ने प्रजेंटेशन के माध्यम से सर्वेक्षण के बारे में विस्तार से जानकारी दी। बापेडिय़ा ने बताया कि इस बार का सर्वे थोड़ा भिन्न होगा। जनवरी के अंतिम सप्ताह या फरवरी 2018 के पहले सप्ताह में होने वाले सर्वेक्षण में 100 नंबरों की प्रतियोगिता होगी। इसमेंं 5 फीसदी शहर में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, 5 फीसदी जागरुकता, व्यवहार में बदलाव, 20 फीसदी कचरा निस्तारण, 15 फीसदी सार्वजनिक-सामुदायिक शौचालय,15 फीसदी हर घर में शौचालय तथा 40 फीसदी अंक घर-घर कचरा संग्रहण, सफाई व परिवहन के मिलेंगे।

क्या है वर्तमान हालत
एक रिपोर्ट के अनुसार नागौर शहर में 40 प्रतिशत मकानों में फ्लश टॉयलेट का उपयोग किया जाता है जबकि महज 20 प्रतिशत मकानों में ड्राई शौचालय बने हुए है। शेष 40 प्रतिशत मकानों में शौचालय नहीं होने के अभाव में लोग खुले में शौच करते हैं। शहर का गंदा पानी डे्रनेज के खुले नालों में बहता हुआ दुलाया तालाब में गिरता है और वहां से पम्प करके पानी को बाहर निकाला जाता है। खुले में पड़ा गंदा पानी पम्परागम जल स्रोतों में मिलने से इनका पानी आम जन के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक भी है। शौचालयों निर्माण व उनकी उपयोगिता को लेकर भी सर्वे में अंक दिए जाएंगे।

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Published on:
25 Dec 2017 12:26 pm
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