धींगा गवर महोत्सव, परंपरा : 16वें दिन रात के समय अलग-अलग वेशभूषा में बैंत लेकर निकलती है महिलाएं, महोत्सव के 15वें दिन निकलेगी लोटिया कलश यात्रा
मेड़ता सिटी. शहर में रविवार को धींगा गवर महोत्सव के तहत अनेक धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। पुष्करणा समाज की महिलाओं ने महोत्सव के तहत धींगा गवर की विशेष पूजा-अर्चना की और गणगौर के गीत गाए। 16 दिनों तक महिलाएं धींगा गवर की विशेष पूजा-अर्चना करेगी और महोत्सव के अंतिम दिन रात्रि के समय स्वांग व अलग-अलग वेशभूषा धारण करेगी। जानकारी अनुसार करीब पिछले 70 सालों से शहर में पुष्करणा समाज की महिलाओं के तत्वावधान में धींगा गवर महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इस बार भी कृष्णा भवन में धींगा गवर महोत्सव मनाया जा रहा है। महिला मंडल की लक्ष्मी पुरोहित ने बताया कि पौराणिक काल में छोटी गवर में समाज के ओक हो गई, इस कारण छोटी गवर के बाद धींगा गवर का पूजन किया जाता है। इसके तहत चैत्र की तीज से वैशाख की तीज तक 16 दिनों तक पुष्करणा समाज की महिलाओं की ओर से धींगा गवर का पूजन किया जाता है। रविवार को वीणा हर्ष, राजेश्वरी बोहरा, शांति व्यास, मीनाक्षी, रेखा पुरोहित, तारा जोशी, रेखा आचार्य, विमला व्यास, आशा पुरोहित, मंजू व्यास, गंगा व्यास, रेणूका थानवी सहित समाज की महिलाओं ने धींगा गवर की विशेष पूजा-अर्चना की और धींगा गंवर के गीत गाए। धींगा गवर महोत्सव के तहत 15वें दिन लोटिया कलश यात्रा शहर में निकाली जाती है। 16वें दिन रात्रि में रातिजोगा रखा जाता है। रात्रि में महिलाएं अलग-अलग स्वांग व अलग-अलग वेशभूषा धारण करती है और हाथों में बैंत रखती है। ऐसी मान्यता है कि रात्रि में किसी कुंवारे युवक के बैंत मारती है तो उसकी शादी जल्दी हो जाती है। इसलिए इसको बैंत मार गवर भी कहा जाता है। उदयपुर , जोधपुर , नागौर, फलौदी, बीकानेर , मेड़ता सहित प्रदेश के अनेक शहरों में पुष्करणा समाज की महिलाएं धींगा गवर महोत्सव मनाती है और विशेष पूजन करती है। शहर में स्व. कमला देवी जोशी, शोभा देवी थानवी एवं जमुना देवी ने लम्बे समय से धींगा गवर का पूजन किया, इनके बाद परम्पराओं को नई पीढ़ी आगे बढ़ा रही है और धींगा गवर पर विशेष आयोजन किए जा रहे हैं।