सरकारी स्कूलों में दरी-पट्टियों की खरीद में कथित अनियमितताओं के मामले ने तूल पकड़ लिया है। विधानसभा में मुद्दा उठने के बाद तत्कालीन सीबीईओ को निलंबित कर दिया गया।
नागौर। डेगाना विधानसभा क्षेत्र के सरकारी स्कूलों में दरी-पट्टियों की खरीद में कथित अनियमितताओं का मामला शुक्रवार को राजस्थान विधानसभा में गूंजा। मामला सामने आने के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विधानसभा में मुद्दा उठने के बाद तत्कालीन मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (सीबीईओ) गोरधनराम डूडी को निलंबित कर दिया गया है, वहीं पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए गए हैं।
विधानसभा में विधायक अजयसिंह किलक ने आरोप लगाया कि कई स्कूलों में दरी-पट्टियां वितरित ही नहीं की गईं, जबकि रिकॉर्ड में उनकी खरीद दर्शा दी गई। उन्होंने कहा कि जब स्कूलों में वास्तविक आवश्यकता स्पष्ट नहीं थी तो इतनी बड़ी संख्या में दरी-पट्टियां किस आधार पर खरीदी गईं। विधायक ने सरकार से आपूर्ति, संख्या और भौतिक सत्यापन की पूरी जानकारी भी मांगी।
शिक्षा एवं पंचायतीराज मंत्री मदन दिलावर ने जवाब देते हुए कहा कि मामला गंभीर है और प्रारंभिक जांच में कई गड़बड़ियों के संकेत मिले हैं। उन्होंने बताया कि मूल रूप से दरी-पट्टियों की सिफारिश की गई थी, लेकिन बाद में दरी की जगह फर्श खरीदे गए। इनमें से 171 फर्शों का रिकॉर्ड अब तक नहीं मिल पाया है, जिससे सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका जताई जा रही है।
विधायक किलक ने आरोप लगाया कि करीब 8,370 रुपए प्रति दरी के हिसाब से खरीद दर्शाई गई और मात्र तीन दिनों के भीतर बिना टेंडर के ही वित्तीय स्वीकृति जारी कर दी गई। उन्होंने इसे गंभीर वित्तीय अनियमितता बताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
विधानसभा में विधायक रामकेश मीणा ने सवाल उठाया कि उस समय के कांग्रेस विधायक विजयपाल मिर्धा अब भाजपा में हैं, ऐसे में क्या सरकार उनके खिलाफ भी कार्रवाई करेगी। इस पर मंत्री दिलावर ने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच होगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त प्रशासनिक व कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मामले को लेकर पूर्व विधायक विजयपाल मिर्धा और पूर्व विधायक रिछपालसिंह मिर्धा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि यदि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप प्रमाणित हो जाते हैं तो वे राजनीति छोड़ने को तैयार हैं। मिर्धा ने दावा किया कि दरी-पट्टी खरीद ब्लॉक स्तर पर नहीं हुई थी और भुगतान की प्रक्रिया जिला परिषद के माध्यम से की गई थी। इस मुद्दे को लेकर डेगाना की राजनीति में विधायक अजयसिंह किलक और पूर्व विधायक विजयपाल मिर्धा के बीच जुबानी जंग तेज होती नजर आ रही है।