जहाँ अक्सर सरकारी स्कूलों को संसाधनों की कमी के लिए जाना जाता है, वहीं डीडवाना-कुचामन जिले के एक छोटे से गाँव केराप के एक शिक्षक ने साबित कर दिया है कि अगर इरादे नेक हों, तो आसमान की ऊँचाइयां भी छोटी पड़ जाती हैं।
राजस्थान की धरा पर गुरु-शिष्य परंपरा की एक अद्भुत मिसाल पेश की गई है। डीडवाना-कुचामन जिले के महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय, केराप के प्रिंसिपल राजेन्द्र ढाका ने अपने स्कूल की तीन होनहार छात्राओं— रंजना नायक, ज्योति मेघवाल और खुशी मेघवाल को आसमान की सैर करवाई। खास बात यह है कि इस 'सपनों की उड़ान' का पूरा खर्च प्रिंसिपल ढाका ने अपनी जेब से वहन किया।
इस पूरी कहानी की शुरुआत स्कूल में आयोजित एक परीक्षा से हुई। प्रिंसिपल राजेन्द्र ढाका ने घोषणा की थी कि परीक्षा में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाली छात्राओं को उनकी पसंद का पुरस्कार दिया जाएगा। जब परिणाम आया और ढाका ने तीनों टॉपर्स से उनकी इच्छा पूछी, तो छात्राओं ने झिझकते हुए कहा— "सर, हमें हेलीकॉप्टर में बैठना है।"
छात्राओं ने शायद यह बात मजाक में या एक दबी हुई इच्छा के तौर पर कही थी, लेकिन प्रिंसिपल ढाका ने इसे चुनौती के रूप में लिया और तुरंत हेलीकॉप्टर राइड बुक करा दी।
प्रिंसिपल राजेन्द्र ढाका ने इस पहल को ‘सपनों की उड़ान’ नाम दिया। उनका कहना है कि सरकारी स्कूलों में अक्सर नामांकन (Enrollment) कम होता जा रहा है। बच्चों में पढ़ाई के प्रति प्रतिस्पर्धा की भावना जगाने और उन्हें स्कूल की ओर आकर्षित करने के लिए इस तरह के नवाचार जरूरी हैं।
ढाका के अनुसार, "बच्चों का काम सपने देखना है और उन सपनों को पूरा करने की जिम्मेदारी हम शिक्षकों की है। जब बच्चों की छोटी इच्छाएं पूरी होती हैं, तो उनका आत्मविश्वास सातवें आसमान पर होता है।"
12 मार्च का दिन केराप गाँव के इतिहास में दर्ज हो गया। जब गाँव के पास हेलीकॉप्टर उतरा, तो पूरा गाँव उसे देखने उमड़ पड़ा। रंजना नायक, ज्योति मेघवाल और खुशी मेघवाल जब हेलीकॉप्टर में बैठीं, तो उनकी आंखों में चमक और चेहरे पर गर्व साफ झलक रहा था।
छात्राओं ने भावुक होते हुए कहा, "हमने कभी नहीं सोचा था कि एक टेस्ट में पास होने पर हमें इतनी बड़ी सौगात मिलेगी। हमारे लिए यह किसी सपने के सच होने जैसा है।"
प्रिंसिपल की इस दरियादिली और शिक्षा के प्रति समर्पण की चर्चा अब सब जगह हो रही है। सोशल मीडिया पर भी लोग राजेन्द्र ढाका की तुलना समाज के उन अग्रदूतों से कर रहे हैं जो शिक्षा के जरिए सामाजिक क्रांति ला रहे हैं। डीडवाना-कुचामन के शिक्षा अधिकारियों ने भी इस पहल की सराहना की है।