
नागौर। नगरीय निकाय चुनाव को लेकर नागौर जिले में सियासी सरगर्मी बढ़ती जा रही है। टिकट वितरण से पहले ही कई निकायों में मुकाबला रोचक नजर आने लगा है। खास बात यह है कि कहीं चाचा-भतीजा तो कहीं मामा-भांजा आमने-सामने हैं। कभी साथ रहने और चुनावी राजनीति में एक-दूसरे का सहयोग करने वाले रिश्तेदार अब एक-दूसरे के खिलाफ शब्दों के बाण चला रहे है।
नागौर जिले की कुचेरा नगर पालिका में इस बार मुकाबला चाचा-भतीजे के बीच राजनीतिक वर्चस्व का बनता दिखाई दे रहा है। चाचा रिछपाल मिर्धा भाजपा की कमान संभाल रहे है, जबकि भतीजे तेजपाल मिर्धा कांग्रेस की ओर से मोर्चा संभाले हुए है। दोनों पक्ष अपने-अपने खेमे को मजबूत करने में जुटे हैं। रिछपाल मिर्धा इस बार भाजपा का बोर्ड बनाने के लिए जोर लगा रहे हैं, वहीं तेजपाल मिर्धा अपनी राजनीतिक जमीन और पालिकाध्यक्ष पद पर पकड़ बनाए रखने के लिए पूरी ताकत लगा रहे है।
इससे पहले दोनों चाचा-भतीजा दो बार साथ मिलकर चुनाव लड़ चुके हैं। दोनों ही मौकों पर तेजपाल मिर्धा पालिकाध्यक्ष बने थे। इस बार राजनीतिक समीकरण बदल गए हैं। रिछपाल मिर्धा के भाजपा में आने के बाद दोनों अलग-अलग खेमों में खड़े हैं। ऐसे में कुचेरा का चुनाव रिश्तेदारी के साथ-साथ राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई भी बन गया है। आरएलपी भी यहां अपना प्रभाव दिखाने के लिए सक्रिय है।
नागौर नगर परिषद में भी रिश्तों के बीच सियासी खींचतान देखने को मिल रही है। यहां मामा मांगीलाल भाटी और भांजा प्रवीण सोलंकी व अखिलेश सोलंकी के परिवार आमने-सामने हैं। कृपाराम सोलंकी के निधन के बाद उनके साले मांगीलाल भाटी को छह महीने के लिए सभापति बनाया गया था। सभापति बनने के बाद दोनों परिवारों के बीच राजनीतिक मतभेद सामने आए और पिछले चुनाव में भी दोनों परिवार आमने-सामने रहे। इस बार भी दोनों परिवारों के आमने-सामने रहने की चर्चा है। बताया जा रहा है कि भाटी परिवार के सामने सोलंकी परिवार की महिला प्रत्याशी को चुनाव मैदान में उतार जा सकता है। हालांकि अभी किसी भी दल ने टिकट की घोषणा नहीं की है, लेकिन संभावित प्रत्याशियों को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है।
नगरीय निकाय चुनाव में वार्ड पार्षद के लिए नामांकन दाखिल करने का सोमवार अंतिम दिन है। इच्छुक अभ्यर्थी दोपहर तीन बजे तक संबंधित रिटर्निंग अधिकारी के समक्ष नामांकन प्रस्तुत कर सकेंगे। जिले के 9 नगर निकायों में चुनाव होने हैं। इनमें चार निकाय ऐसे हैं, जहां पहली बार नगर निकाय चुनाव होंगे। इन क्षेत्रों में अब तक मतदाता सीधे सरपंच का चुनाव करते थे, लेकिन निकाय बनने के बाद वार्ड पार्षद चुने जाएंगे और यही पार्षद आगे पालिकाध्यक्ष का चुनाव करेंगे। नामांकन प्रक्रिया के अंतिम चरण में सैकड़ों आवेदन आने की संभावना है।