श्रीमद भागवत कथा मनुष्य को जीवन जीने की कला सिखाती है
खींवसर/ नागौर. श्रीमद भागवत कथा मनुष्य को जीवन जीने की कला सिखाती है। कथा श्रवण से मनुष्य के लोक परलोक सुधरते हैं। ग्राम आचीणा में श्रीमद भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह के छठे दिन सोमवार को कथावाचक श्रीबालाजी सेवा धाम के महंत स्वामी बजरंगदास महाराज प्रवचन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि संसार में परमात्मा के नाम से बढक़र कुछ नहीं है। कथा प्रवचन में भक्त प्रहलाद का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा कि परमात्मा को अपने भक्त प्रिय होते हैं। भागवत में परमात्मा की नौ प्रकार से भक्ति बताई गई है, जिससे भगवान प्रसन्न होते हैं। उन्होंने प्रभु भक्ति में भागवत कथा सुनने को सर्वश्रेष्ठ भक्ति बताया। इसके साथ ही कीर्तन, नाम स्मरण, चरण वन्दन, पूजन, सखा एवं दास भाव से आराधना भगवान की भक्ति के मार्ग बताए। उन्होंने कहा कि घर में राम राम का कीर्तन करने से परिवार के बच्चे संस्कारित होते हैं।
माता-पिता की करें सेवा
कथा में महंत बजरंगदास महाराज ने कहा कि संसार में मां-बाप से बढक़र कोई नहीं है। संतान को माता-पिता की सेवा करने, भावी पीढ़ी को नशे से दूर रहने की सलाह देने, दहेज लेने एवं देने को अपराध बताते हुए भू्रण हत्या को जघन्य अपराध बताया। कथा में हैसाबा, आचीणा, माडपुरा, पांचलासिद्धा, पांचौड़ी, शिवनाडा, बैराथल, देऊ, श्रीबालाजी सहित आस-पास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा सुनने पहुंच रहे हैं। जिससे भगवान प्रसन्न होते हैं। उन्होंने प्रभु भक्ति में भागवत कथा सुनने को सर्वश्रेष्ठ भक्ति बताया। इसके साथ ही कीर्तन, नाम स्मरण, चरण वन्दन, पूजन, सखा एवं दास भाव से आराधना भगवान की भक्ति के मार्ग बताए। उन्होंने कहा कि घर में राम राम का कीर्तन करने से परिवार के बच्चे संस्कारित
होते हैं।
पूर्णाहुति आज
कथा की मंगलवार को पूर्णाहुति होगी। इस दौरान कई धार्मिक आयोजन होंगे। पूर्णाहुति के दौरान शोभायात्रा निकाली जाएगी तथा बुधवार को यज्ञ का अनुष्ठान किया जाएगा। इस दौरान भण्डारे का भी आयोजन किया जाएगा। भण्डारे में आस-पास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेंगे।