
चौसला. सूर्यदेव के तीखे तेवर होने से खेतों की नमी सूखने लगी है। इससे रबी फसलों की बुआई की तैयारी में जुटे किसानों की चिंता बढ़ी हुई है। गौरतलब है कि गेहूं की फसल को अधिक सिंचाई की जरूरत होती है इस कारण अबकी बार किसानों ने इसकी बुआई का रकबा भी घटाया है। जबकि दलहनी चना, मटर, मसूर व गेहूं की फसल तो एकाद किसानों को छोडकऱ अधिकतर जौ की बुआई करने के लिए खेतों को तैयार कर तापमान घटने का इंतजार कर रहे है। पिछले कुछ दिनों से तापमानी पारा अधिक चल रहा है। ऐसे में पिछले दिनों हुई बारिश का असर भी खेतों की मिट्टी से गायब होता जा रहा है। ऐसे में किसान सिंचाई साधन विहीन को समझ नहीं आ रहा है कि वे कौन सी फसल की बुआई करें। गेहूं के लिए पानी की अधिक जरूरत होती है जबकि इसके पूर्व सरसों की बुआई करने वाने किसान चिंतित है। सरसों की बुआई करने वाले किसानों की चिंता यह है कि अभी बुआई करते है तो पौधों के जलने की आशंका रहेगी जबकि बाद में बुआई करते है तो माहू और फंफूदी रोग लगने की आशंका रहेगी। इस प्रकार के हालात में कई किसान जुआरी जैसे हालात का सामना कर रहे है। आमतौर पर सरसों की बुआई 15 अक्टूबर तक हो जाती है। पर सूर्यदेव के तीखे तेवर के चलते किसान कुछ दिन बाद बुआई करने के विचार में है। ज्यादा दिन तक बुआई को टाला नहीं जा सकता इसलिए अब कई किसान बुआई करने के लिए तैयार हो रहे है। इस बार कम बारिश होने और भू-जलस्तर गिर जाने की स्थिति में कृषि अधिकारियों द्वारा किसानों को रबी सीजन की फसलों में चना, जौ, सरसों की बुआई अधिक क्षेत्रफल में करने का मशबरा दिया जा रहा है। गेहूं की फसल को पांच-सात बार सिंचाई की जरूरत होती है, लेकिन इसकी भी कुछ किस्में ऐसी है जिनमें कम सिंचाई के बाद भी अच्छा उत्पादन लिया जा सकता है। इनमें लोकमन, सुजाता, एम्पीडब्ल्यू 1203, आरबीडब्ल्यू 4106 , एमपी 4010, नर्मदा 104, मालवशक्ति, मालवश्री शामिल है।
इनका कहना है
रबी फसलों को पर्याप्त नमी की जरूरत होती है, सरसों के लिए अभी उपयुक्त वातावरण बन रहा है। तपिश को देखते हुए जौ की बुआई 1 नवम्बर व गेहूं की बुआई 15 नवम्बर बाद करें।
सुरेन्द्र बाना सहायक कृषि अधिकारी नावां