संस्था प्रधान ने गांव वालों की मदद से जीर्ण-शीर्ण चार कमरों के स्कूल को बना दिया 12 कमरों का विद्यालय, नए कक्षा-कक्षों के साथ ही बालिकाओं के लिए अत्याधुनिक शौचालय का भी कराया निर्माण, इसी सत्र से ड्रेस कोड सहित दस सूत्र लागू करने पर जताई सहमति
नागौर. बच्चों के शैक्षिक विकास और सुविधा जुटाने को अगर शिक्षक कुछ करने का संकल्प ले तो सरकारी विद्यालयों की तस्वीर बदलने में कोई बाधा नहीं आ सकती। बस जरूरत है शिक्षकों के पहले करने की ही। शिक्षकों के इसी संकल्प और प्रयास ने बिना सरकारी मदद लिए भामाशाहों के सहयोग से राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बाराणी का नक्शा बदलकर रख दिया। संस्था प्रधान मगनाराम गोदारा ने बताया कि वर्ष 2015 में विद्यालय के लिए साढ़े 17 बीघा भूमि मिली थी, लेकिन विद्यालय चार कमरों में संचालित था। ये कमरे भी जीर्ण-शीर्ण थे। अध्यापक बालकिशन भाटी ने विद्यालय के अन्य स्टॉफ के साथ मिलकर भामाशाहों से मुलाकात की। ग्रामीणों ने भी शिक्षा का महत्व समझते हुए धनराशि एकत्रित करने का काम शुरू कर दिया। तकरीबन साढ़े तीन लाख की राशि एकत्रित होने पर विद्यालय की जमीन पर छह नए कक्षा-कक्ष बनवाने के साथ ही स्टोर रूम व प्याऊ का निर्माण भी करवाया। गत वर्ष रमसा ने भी छह नए कक्षा-कक्ष बनवा दिए। इससे विद्यालय में कमरों की संख्या एक दर्जन तो बच्चों की संख्या भी 300 के ऊपर पहुंच गई। संस्था प्रधान गोदारा बताते हैं कि बाराणी के पूर्व सरपंच भंवराराम सारण सहित कई प्रबुद्धजनों की टीम ने इस विद्यालय को संवारने में हरसंभव मदद दी। विद्यालय के बच्चों ने भी विभिन्न मौकों पर धनराशि अर्पित की। अब गांववाले इस विद्यालय को निजी विद्यालय से बेहतर बनाने के प्रयास में जुटे हैं।
विज्ञान संकाय के लिए करेंगे प्रयास
गोदारा व सरपंच आशाराम जांगू ने बताया कि आस-पास के तकरीब तीन -चार किलोमीटर के ग्रामीण क्षेत्रों से बच्चे यहां पढऩे आते हैं। विद्यालय में केवल आर्टस संकाय है। विज्ञान संकाय नहीं होने के कारण कई बच्चों को विद्यालय छोड़कर बाहर जाना पड़ता है। इस बार विज्ञान संकाय खुलवाने के लिए प्रयास किया जाएगा।
ड्रेस कोड करेंगे लागू
विद्यालय को बेहतर स्वरूप देने के लिए संस्था प्रधान की ग्रामीणों के साथ हुई बैठक में ड्रेस कोड सहित दस बिन्दुओं पर चर्चा हुई। इसमें ग्राम सेवा सहकारी समिति अध्यक्ष मोहनराम सारण, ग्राम पंचायत सरपंच आशाराम जांगू, वार्ड पंच कृष्णाराम, श्रवणराम सुक्खाराम सारण, अर्जुनराम नाइक, शेलाराम मेघवाल, रूपाराम नाइक, कमल जांगू आदि उपस्थित थे। बैठक में सर्वसम्मति से तय किया गया कि विद्यालय को सभी संसाधनों से सुसज्जित करने के साथ ही संस्था प्रधान व शिक्षकों के लिए इसमें ड्रेस कोड भी लागू किया जाएगा, ताकि बच्चों में अनुशासन का संदेश जाए।