संस्कृत स्कूलों में लगातार घट रहा है विद्यार्थियों का नामांकन, प्रदेश के 1814 संस्कृत विद्यालयों में 503 ऐसे, जहां मात्र एक शिक्षक कार्यरत, संस्कृत महाविद्यालयों में भी पूरे नहीं है शिक्षक, विद्यालयों में 4 व महाविद्यालयों में 6 औसत शिक्षक
नागौर. राजस्थान में संस्कृत शिक्षा की स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है, जो चिंताजनक है। प्रदेश के 1814 संस्कृत विद्यालयों में पिछले पांच साल में करीब 40 हजार विद्यार्थी कम हो गए हैं। चिंता की बात यह है कि संस्कृत स्कूलों में नामांकन लगातार घट रहा है, ऐसे में सरकार को जल्द ही इस ओर ध्यान देने की आवश्यकता है अन्यथा संस्कृत स्कूलों पर ताले लगाने की नौबत आ जाएगी।
राज्य सरकार की एक रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में संस्कृत विद्यालयों में औसत नामांकन 69 तथा औसत शिक्षकों की संख्या 4 ही है। इसी प्रकार संस्कृत महाविद्यालयों में औसत नामांकन 159 का है और औसत शिक्षकों की संख्या 6 है।
गौरतलब है कि वर्तमान में प्रदेश के 1814 संस्कृत विद्यालयों में पढऩे वाले विद्यार्थियों की संख्या एक लाख, 24 हजार, 808 है, जबकि यहां कार्यरत शिक्षकों की संख्या मात्र 7340 ही है। यही हाल उच्च शिक्षा का है। प्रदेश में कुल 51 संस्कृत महाविद्यालय हैं, जहां 315 शिक्षक कार्यरत हैं। संस्कृत शिक्षकों का कहना है कि शिक्षकों के अभाव में संस्कृत विद्यालयों में लगातार नामांकन घटने की मुख्य वजह शिक्षकों की कमी है, सरकार न तो नई भर्ती कर रही है और न ही डीपीसी। प्रदेश में 500 से अधिक विद्यालय केवल एक शिक्षक के भरोसे संचालित हो रहे हैं, जबकि कुछ विद्यालय ऐसे भी हैं, जहां एक भी शिक्षक नहीं है, वहां विभाग प्रतिनियुक्ति से काम चला रहा है।
इस प्रकार गिरा संस्कृत स्कूलों में नामांकन
सत्र - नामांकन - शिक्षक
2025-26 - 1,24,808 - 7340
2024-25 - 1,24,922 - 7023
2023-24 - 1,39,104 - 6978
2022-23 - 1,53,170 - 7120
2021-22 - 1,67,215 - 7240
प्रदेश में संभागवार संस्कृत महाविद्यालयों व विद्यालयों की संख्या
संभाग - महाविद्यालय - विद्यालय - एकल शिक्षक वाले विद्यालय
अजमेर - 7 - 68 - 99
उदयपुर - 6 - 222 - 76
कोटा - 5 - 132 - 32
जयपुर - 16 - 582 - 69
बीकानेर - 5 - 183 - 65
भरतपुर - 6 - 173 - 30
जोधपुर - 6 - 250 - 132
कुल - 51 - 1814 - 503
नई भर्ती करके संस्कृत स्कूलों को संजीवनी दे सरकार
हां, यह सही है कि संस्कृत शिक्षा में शिक्षकों की कमी के कारण विद्यालयों में नामांकन लगातार घट रहा है। बहुत सारे विद्यालय एकल शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं तो कुछ ऐसे विद्यालय भी हैं, जो शिक्षक विहीन हैं, जहां प्रतिनियुक्ति के सहारे काम चलाया जा रहा है। हमारी सरकार से मांग है कि जल्द से जल्द सबसे पहले तृतीय श्रेणी शिक्षकों की भर्ती करके एकल एवं शिक्षक विहीन विद्यालयों को संजीवनी दी जाए तथा अन्य सभी संवर्ग की डीपीसी की जाए।
- गणेशराम जांगू, जिला अध्यक्ष, संस्कृत शिक्षक संघ, नागौर