नागौर

इस विभाग की लापरवाही से देश के ‘भविष्य’ के साथ हो रहा कुछ ऐसा..

लापरवाह अधिकारियों की वजह से कागजों में अटकी टेण्डर प्रक्रिया...  

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Oct 07, 2017
This department's negligence is happening with the 'future' of the country.

देवेन्द्र प्रताप सिंह/ नागौर. सरकारी स्कूलों में सुविधाएं जुटाने के लिए शिक्षक से लेकर संस्था प्रधानों तक भामाशाहों से सम्पर्क साध रहे हैं, वहीं करीब डेढ़ साल पहले राज्य सरकार की ओर से स्कूलों में फर्नीचर लगाने के लिए जारी किया गया करीब तीन करोड़ का बजट जस का तस पड़ा है। विभाग द्वारा टेण्डर प्रक्रिया शुरू नहीं करने से बजट लैप्स होने का खतरा बढ़ गया है। फर्नीचर के अभाव में विद्यार्थी भी फर्श पर बैठने को मजबूर हैं। विभागीय अधिकारी जिले के करीब ३६ माध्यमिक व उच्च माध्यमिक स्कूलों में फर्नीचर लगाने को लेकर टेण्डर प्रक्रिया शुरू होने का दावा कर रहे हैं। जब कि सच यह है कि अब तक टेण्डर प्रक्रिया शुरू तक नहीं हुई है। जिले में माध्यमिक व उच्च माध्यमिक शिक्षा के 120 विद्यालयों में फर्नीचर लगाने के लिए सरकार ने 3 करोड़ 36 लाख 80 हजार रुपए जारी किया है।

अलग-अलग टेण्डर जारी करने के निर्देश दिए हैं

आलम यह है कि शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों के दिशा-निर्देशों की पालना जिलाधिकारी कागजों में पूरी कर रहे हैं। टेण्डर प्रक्रिया में देरी को लेकर राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद (रमसा) के अधिकारियों ने बताया कि पहले टेण्डर प्रक्रिया जिला स्तर पर कलक्टर के नेतृत्व में एक साथ होनी थी। इसमें एक ही फर्म से जिले के सभी स्कूलों में फर्नीचर लगाने के लिए एक साथ टेण्डर प्रक्रिया शुरू होनी थी। उच्चाधिकारियों ने अब रमसा द्वारा सभी स्कूलों के लिए अलग-अलग टेण्डर जारी करने के निर्देश दिए हैं। इस कारण टेण्डर प्रक्रिया में देरी हो रही है। एक कारण यह भी है कि यदि एक ही फर्म सभी स्कूलों में फर्नीचर लगाने के लिए टेण्डर की शर्ते पूरा करती भी है तो उस फर्म को टेण्डर की निविदा शुल्क के ही हजारों रुपए देने होंगे। इस कारण फर्म टेण्डर लेने के लिए आगे नहीं आ रही हैं।

गाइड लाइन का अभाव
शुरुआती दौर में किसी प्रकार की गाइड लाइन नहीं थी। इस कारण कुछ समय ऐसे ही निकल गया। मई 2017 में रमसा के डीपीसी की अध्यक्षता में जिला स्तरीय कमेटी द्वारा फर्नीचर के लिए ई टेण्डर किए गए। जिसमें 36 स्कूलों में फर्नीचर लगाने के लिए फर्मों ने टेण्डर किए हैं, जो प्रक्रियाधीन हैं।
रामदेव पूनिया, एडीपीसी, रमसा, नागौर

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Published on:
07 Oct 2017 10:42 am
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