नागौर

सवा साल बाद लौट आए करण-अर्जुन: दो दोस्तों की साथ हुई मौत, दोनों के घर एक साथ फिर आई जन्म की खुशी

मोकलपुर के नरेंद्र बेड़ा और सातलावास के नरेंद्र मुंवाल की हादसे में हुई थी मौत, दोनों की माताओं ने नसबंदी खुलवाने के बाद दिया पुत्रों को जन्म
2 min read
• •
Oct 07, 2026
12 घंटे के अंतराल में जन्मे दो बेटे, डेढ़ साल पहले इसी अंतराल में खोए थे दोनों दोस्त
12 घंटे के अंतराल में जन्मे दो बेटे, डेढ़ साल पहले इसी अंतराल में खोए थे दोनों दोस्त

मेड़ता सिटी. "जन्म-जन्म का साथ...' ये कहीं फिल्मों में आपने जरूर सुना होगा। इसी वाक्य को चरितार्थ करते एक संयोग ने सभी को खुशी के आंसू से भावुक कर दिया। 1 साल 2 महीने 21 दिन पहले... मेड़ता के पास मोकलपुर व सातलावास के रहने वाले दो खास दोस्तों की चितौड़गढ़ में झरने में डूबने से मौत हो गई थी। अब उन्हीं दोनों दोस्तों के मांओं की कोख से पुत्रों का जन्म हुआ। संयोग यह कि दोनों के जन्म में सिर्फ 12 घंटे का अंतर। एक खास बात यह भी है कि दोनों माताओं ने अपने नसबंदी का ऑपरेशन करवा लिया था। जिन्हें वापस खुलवाया और फिर उन दोनों ने बेटों का जन्म दिया है।

दरअसल, मोकलपुर गांव निवासी नरेंद्र बेड़ा और सातलावास निवासी नरेंद्र मुंवाल चित्तौड़गढ़ के बस्सी में नर्सिंग सेकंड ईयर के छात्र थे और 14 जुलाई 2025 को अपने तीसरे दोस्त जोधपुर निवासी प्रदीप विश्नोई के साथ निलिया महादेव का झरना में पिकनिक मनाने गए थे। पानी के तेज बहाव के कारण डूबने से तीनों युवकों की मौत हो गई थी।

कुदरत का करिश्मा

मोकलपुर निवासी नरेंद्र बेड़ा व सातलावास निवासी नरेंद्र मुंवाल, दोनाें ही अपने पिता की इकलौती संतान थी। घटना से मोकलपुर और सातलावास के साथ क्षेत्र में शोक की लहर छा गई। अब इसे कुदरत का करिश्मा कहे या संयोग लेकिन नरेंद्र बेड़ा का शव उसी दिन मिल गया था और अंतिम संस्कार उसी दिन हो गया। जबकि नरेंद्र मुवाल का शव करीब 12 घंटे बाद मिला और अंतिम संस्कार दूसरे दिन हुआ। और अब मृतक दोनों नरेंद्र की माताओं ने 12 घंटे के ही अंतराल से पुत्रों का जन्म दिया है।

दोनों परिवारों में दौड़ी खुशियां

करीब डेढ़ साल पहले अपने बेटों को खोने के बाद अब उन्हीं घरों के चिराग फिर जन्मे है। नरेंद्र बेड़ा के दादा शुभकरण बेड़ा ने कहा कि हमें हमारा बेटा वापस मिल गया। ऊपर वाले ने हमारी सुन ली, आज मेरे जीवन का सबसे खुशी वाला दिन है। पिता बाबूलाल बेड़ा ने कहा कि ठीक डेढ़ साल बाद हमारे घर की सूनी गोद को भगवान ने फिर भर दिया है। वहीं सातलावास निवासी नरेंद्र मुंवाल के दादा भगवानाराम और पिता सीताराम मुंवाल ने कहा कि ऐसा लग रहा है मानो हमारा वहीं नरेंद्र लौट आया हो।

4 को शाम 7 बजे पहला तो 5 अक्टूबर की सुबह 9 बजे दूसरा जन्म

मोकलपुर निवासी सुरेंद्र लटियाल ने बताया कि मोकलुपर निवासी बाबूलाल बेड़ा को 4 अक्टूबर की शाम 7 बजे पुत्र संतान सुख मिला। वहीं इसके 12 घंटे बाद 5 अक्टूबर की सुबह 9 बजे सातलावास निवासी सीताराम के आंगन में खुशियों ने दस्तक दी। उल्लेखनीय है कि नरेंद्र बेड़ा व नरेंद्र मुंवाल बचपन के गहरे दोस्त थे। कक्षा 6 से इनकी दोस्ती शुरू हुई और 12वीं तक साथ पढ़े। नर्सिंग में मेरिट छूटने पर दोनों को एक ही कॉलेज मिला। हादसे वाले दिन भी दोनों साथ ही चित्तौड़गढ़ की झील में घूमने गए थे।

नसबंदी खुलवाने के बाद मिला संतान सुख

उल्लेखनीय है कि मृतक नरेंद्र बेड़ा व मुंवाल, दोनों के माताओं ने नसबंदी का ऑपरेशन करवा रखा था। लेकिन दोनों ने जयपुर में अपनी नसबंदी वापस खुलवाई। जिसके बाद ऐसा संयोग बना कि दुनिया से एकसाथ विदा लेने वाले दोस्तों की माताओं ने सिर्फ 12 घंटों के अंतराल में दोनों पुत्रों को जन्म दिया है। यह वाक्या पूरे क्षेत्र में अभी चर्चा का विषय बना हुआ है।

Updated on:
07 Oct 2026 01:25 pm
Published on:
07 Oct 2026 01:25 pm