नागौर-सालासर हाइवे को फोरलेन करने का काम नागौर में अटका, एनएचआई ने 100 फीट जमीन की थी अधिगृहित, बस स्टैण्ड के पास नहीं हट पाए पक्के निर्माण
नागौर. राष्ट्रीय राजमार्ग 65 के सालासर-नागौर सेक्शन के निर्माण कार्य में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) व जिला प्रशासन के अधिकारियों द्वारा बरती जा रही लापरवाही के चलते विकास कार्य पर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार यहां भी राजनीतिक रसूखात विकास कार्य में बाधक बन गए हैं, जैसा कि नागौर में आए दिन देखने को मिलता है। यदि यही स्थिति रही तो न केवल प्रशासन की फजीहत होगी, बल्कि राष्ट्रीय राजमार्ग को फोरलेन करने का काम भी ठंडे बस्ते में चला जाएगा।
गौरतलब है कि करीब साढ़े पांच सौ करोड़ के प्रोजेक्ट के तहत एनएच-65 पर सालासर-नागौर सेक्शन की करीब 120 किलोमीटर सड़क को फोरलेन में बदलना है। यह सड़क सालासर से नागौर के विजय वल्लभ चौराहे तक चौड़ी होनी है, लेकिन बस स्टैण्ड से डीडवाना बाइपास तक सड़क के दोनों तरफ पर्याप्त जगह नहीं होने पर एनएचएआई ने जमीन अधिगृहित की, जिसमें काफी पक्के निर्माण भी शामिल हैं।
ढील पड़ गई भारी
अधिगृहित की गई जमीन पर बने पक्के निर्माण हटाने के लिए प्रशासन ने सम्बन्धित मालिकों को नोटिस देने के बाद गत 19 फरवरी को एसडीएम परसाराम टाक ने अंतिम चेतावनी देते हुए तीन दिन का समय दिया था। तीन दिन में पक्के निर्माण नहीं हटाने पर प्रशासन द्वारा निर्माण कार्य तोडऩे की बात कही थी, जिसके बाद ज्यादातर लोगों ने अपने स्तर पर पक्के निर्माण तोड़कर पत्थर व पट्टियां कब्जे में ले ली। लेकिन कुछ लोगों ने प्रशासन के आदेशों को अनसुना करते हुए पक्के निर्माण नहीं हटाए। हालांकि शुरू में एसडीएम टाक ने तीन दिन का समय दिया, लेकिन जिन लोगों 15 दिन बाद भी पक्के निर्माण नहीं तोड़े, उनके निर्माण कार्य तोडऩे की बजाय प्रशासन एवं एनएचएआई ने न्यायालय में जाने का मौका दिया। जिसके चलते कुछ लोग स्थगन आदेश ले आए। हालांकि स्थगन आदेश भी ज्यादा दिन नहीं रहा। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार वर्तमान में किसी प्रकार का स्थगन आदेश नहीं है। इसके बावजूद पक्के निर्माण तोडऩे का काम बंद है।
हमारा क्या गुनाह
दुकानदार सुरेन्द्र सांखला, घनश्याम प्रजापत, महेन्द्र कुमार, घनश्याम सांखला, राजेन्द्र चौधरी, कृपाराम टाक सहित अन्य व्यापारियों ने बताया कि प्रशासन के निर्देश पर उन्होंने अधिगृहित की गई जमीन से पक्के निर्माण दो माह पहले ही हटा लिए, लेकिन कुछ रसूखदार एवं राजनीतिक पहुंच वाले लोगों के आज भी पक्के निर्माण ज्यों के त्यों हैं, जिसके कारण सड़क निर्माण का काम अधूरा पड़ा है और दुकानों के आगे मलबा पड़ा होने से काम-धंधा चौपट हो गया है। ऐसा लग रहा है जैसे हमने प्रशासन का सहयोग करके कोई गुनाह कर दिया।
दुकानदारों ने वापस जमाया कब्जा
प्रशासन की चेतावनी के बाद जिन दुकानदारों ने पक्के निर्माण तोड़े थे, उन्होंने अब वापस कब्जा जमा लिया है। उनका कहना है कि प्रशासन को यदि पक्के निर्माण तोडऩे हैं तो सबके हटाए, अन्यथा हमें भी वापस बनाने की अनुमति दी जाए और जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई की जाए। ऐसे में यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाया गया तो एनएचएआई व प्रशासन को पहले जितनी मशक्कत पक्के निर्माण हटाने के लिए करनी पड़ी थी, उससे ज्यादा अब करनी पड़ेगी।
हम पूरा प्रयास कर रहे हैं
सालासर-नागौर फोरलेन का काम पूरा करने के लिए हम पूरा प्रयास कर रहे हैं। नागौर शहर में कुछ पक्के निर्माण नहीं हटने से परेशानी आ रही है, लेकिन प्रशासन का सहयोग मिल रहा है, उम्मीद है जल्द ही काम कर देंगे।
- आरिफ मोहम्मद, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, सालासर-नागौर सेक्शन, एनएच-65
हम तो केवल सहयोगी हैं
फोरलेन सड़क के लिए अधिगृहित की गई जमीन पर बने पक्के निर्माण तोडऩे की जिम्मेदारी एनएचएआई की है, प्रशासन का काम केवल लॉ एंड ऑर्डर संभालना है। डेह रोड पर कुछ लोगों ने निर्माण कार्य के अनुरूप ज्यादा मुआवजे की मांग की थी, जिसका एसेसमेंट बनाकर एनएचएआई को भेज दिया। पट्टा होने पर ही जमीन का भुगतान मिलेगा अन्यथा पक्के निर्माण का मुआवजा दिया जाएगा।
- परसाराम टाक, उपखंड अधिकारी, नागौर