गर्मियां तेज होने के साथ ही जलस्त्रोतों के सूखने से पेयजल के लिए भटकने लगे वन्यजीव
चौसला. क्षेत्र के वन्यक्षेत्र में गर्मियां तेज होने के साथ ही जलस्त्रोतों के सूखने से वन्यजीव भी पेयजल के लिए भटकने लगे है। यहां राजास पहाड़ी सहित आस-पास व बनगढ़ स्थित घना वन्यक्षेत्र तथा पास ही सांभर झील है। राजास स्थित देव डूंगरी के दक्षिण छोर में पहाड़ी की तलहटी में हर समय आबाद रहने वाला तालाब इन दिनों सूख जाने से यहां विचरण करने वाले वन्यजीव पानी के भटक रहे है यहीं हाल बनगढ़ स्थित जंगल का है। यहां विश्वविख्यात में प्रसिद्ध और हरदम पानी से लबालब रहने वाली सांभर झील का अधिकतम हिस्सा सूख गया। झील के आस-पास और राजास पहाड़ी में विचरण करने वाले वन्यनीव नील गाय, खरगोश, लोमड़ी व अन्य कई शाकहारी व मांसाहारी दोनों ही प्रकार के वन्यजीवों के लिए पानी की समस्या खड़ी होने लगी है।सडक़ किनारे आते है नजर- इन जंगलों और झील में पानी की कमी होने से वन्यजीव पानी का तलास में रात में भटकते हुए सडक़ किनारों तक पहुंच जाते है। ऐसे में सडक़ हादसों में कई वन्यजीवों की जान चली जाती है। गर्मियों में नील गाए व लोमडिय़ों, सर्पो, नवलों, खरगोश के अलावा कई स्थानों पर तेन्दुए के बच्चे समेत कई प्रकार के वन्यजीव सडक़ हादसों में अपनी जान गवा चुके है।
करीब 10-15 दिन पूर्व मेगा हाइवे के पास खेत में एक नील गाय पानी के लिए भटकते हुए आबादी क्षेत्र में आ गई थी इसी दौरान खेतों में रखवाली करने वाले किसान के अचानक शोर मचाने पर ऊंची मेड़ से छलांग लगाते वक्त मौत हो गई थी वहीं दो माह पूर्व बीणजारी नाडी के पास हाईवे पर किसी वाहन की चपेट में आने से खरगोश की जान चली गई थी।
कस्बे से महज चार किलोमीटर दूर पिपराली, लोहराणा, डाबसी, गोविन्दी मारवाड़ के पास से गुजर रही मेंढा नदी व आस-पास के छोटे-बड़े जलस्त्रोतों में पानी की एक बुंद नहीं होने के कारण पेयजल संकट खड़ा हो गया है। इससे भटकते हुए वन्यजीव कस्बों व गांवों के पास पहुंचकर नलों व अन्य स्त्रोतों से प्यास बुझाते है।
नदी किनारे बने कई कुओं पर मिलती है राहत- क्षेत्र में मेंढा नदी व सांभर झील के आस-पास वाले कई स्थानों पर बने कुओं के जलस्त्रोतों पर वन्यजीवों को काफी राहत मिलती है।