
Narsinghpur news: मन में मधुमक्खियों के डंक का डर, पेटियों को संभालने की चिंता और शहद बेचने को लेकर असमंजस व रोक-टोक कभी यही बातें गांव की महिलाओं को इस काम से दूर रखती थीं। आज वही महिलाएं इन आशंकाओं को पीछे छोडकर बदलाव की तस्वीर पेश कर रही हैं। नरसिंहपुर जिले के बोहानी और करेली कला गांवों की महिलाएं मधुमक्खी पालन में जुटी हैं। स्व-सहायता समूहों से जुड़ी 22 से अधिक महिलाएं 'मधुमक्खी दीदिया' बनकर शहद उत्पादन के जरिए अपनी आजीविका मजबूत करने की कोशिश कर रही हैं। मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत चांवरपाठा विकासखंड के बोहानी और गोटेगांव विकासखंड के करेली कला में यह गतिविधि संचालित की जा रही है। दोनों गांवों में करीब 70-70 मधुमक्खी पेटियां लगाई गई हैं।
कोलकाता से मंगाई गई प्रत्येक पेटी की कीमत करीब पांच हजार रुपए है। बोहानी में प्रेरणा स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने इसकी शुरुआत की थी। शुरुआती दौर में यहां दो बार में करीब दो क्विंटल शहद का उत्पादन हुआ, जिसका अलग-अलग चरणों में विक्रय किया गया। इसके बाद करेली कला में जयंती स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने भी इस काम को अपनाया। यहां शुरुआती चरण में 10 पेटियों से 22 किलो 500 ग्राम शहद प्राप्त हुआ।
करेली कला की महिलाएं मधुमक्खी पालन को आमदनी के बेहतर विकल्प के रूप में देख रही हैं। उनके मुताबिक, एक पेटी से साल में 3 से 4 बार शहद निकाला जा सकता है औरउत्पादन करीब सात लीटर तक हो सकता है। बाजार में शुद्ध शहद की कीमत 400 से 500 रुपए प्रति लीटर बताई जाती है। इस हिसाब से 100 पेटियों से सालाना करीब 700 लीटर शहद का उत्पादन होने पर 2.80 लाख से 3.50 लाख रुपए तक की सकल बिक्री संभव है।
डीपीएम मीना परते के अनुसार, बारिश के दौरान शहद उत्पादन प्रभावित होता है, अपने स्तर पर शहद बेचती हैं। बेहतर पैकेजिंग और बाजार से जबकि ठंड के मौसम में काम बढने की उम्मीद है। फिलहाल समूह की महिलाएं पर से सीधे जुड़ाव मिलने यह पहल ग्रामीण महिलाओं के लिए कमाई का मजबूत जरिया बन सकती है।
आजीविका मिशन के ब्लॉक प्रबंधक अनिल नेमा और अजीत कुशवाहा के अनुसार, मधुमक्खियां पेटियों से निकलकर करीब दो किलोमीटर के दायरे में फूलों से रस एकत्र करती हैं और वापस अपनी पेटियों में लौट आती हैं। प्रत्येक पेटी में रानी मक्खी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उसकी मौजूदगी और उससे निकलने वाली विशेष गंध अन्य मधुमक्खियों को उसी पेटी से जुड़े रहने में मदद करती है।