MP News: कॉलोनाइजर से टीएनसीपी को रिपोर्ट भेजने के एवज में एसडीएम का स्टेनो मांग रहा था 30 हजार रुपये की रिश्वत।
MP News: मध्य प्रदेश में रिश्वतखोर अधिकारी-कर्मचारियों पर कार्रवाई का सिलसिला लगातार जारी है। लगभग हर दूसरे दिन कहीं न कहीं लोकायुक्त (Lokayukta Action) रिश्वतखोर अधिकारी-कर्मचारियों को रिश्वत (Bribe) लेते हुए रंगेहाथों पकड़ रही है लेकिन इसके बावजूद रिश्वतखोर बाज आते नजर नहीं आ रहे हैं। ताजा मामला मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर जिले का है जहां एसडीएम के स्टेनो (Steno) को लोकायुक्त जबलपुर की टीम ने 30 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगेहाथों पकड़ा है।
नरसिंहपुर जिले के तेंदूखेड़ा के रहने वाले संजय राय लोकायुक्त कार्यालय जबलपुर में शिकायत दर्ज कराते हुए बताया था कि कॉलोनी निर्माण का नक्शा प्रस्तावित करने हेतु एसडीएम तेंदूखेड़ा कार्यालय को स्थल निरीक्षण रिपोर्ट लगाने हेतु आवेदन दिया था। जिसको एसडीएम कार्यालय तेंदूखेड़ा द्वारा बिना वजह विलंब किया जा रहा है एवं एसडीएम तेंदूखेड़ा के स्टेनो सौरभ यादव के द्वारा उनसे 30000 रुपये रिश्वत की मांग कर रहा है।
लोकायुक्त की टीम ने शिकायत की जांच की और शिकायत सही पाए जाने पर गुरुवार को फरियादी संजय राय को रिश्वत देने के लिए रिश्वतखोर स्टेनो सौरभ यादव के पास भेजा। स्टेनो ने रिश्वत की रकम देने के लिए फरियादी को एसडीएम कार्यालय तेंदूखेड़ा में बुलाया। लोकायुक्त की टीम दफ्तर में पहले से सादे कपड़ों में मौजूद थी और जैसे ही स्टेनो ने रिश्वत के रुपये लिए तो लोकायुक्त की टीम ने उसे रंगेहाथों पकड़ लिया। आरोपी स्टेनो सौरभ यादव के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (संशोधित 2018) की धारा 7 के तहत अपराध दर्ज कर कार्रवाई की गई है।
एक दिन पहले बुधवार को मध्यप्रदेश के सिवनी जिले में भी जबलपुर लोकायुक्त की टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए रिश्वतखोर ASI दिनेश रघुवंशी को बस स्टैंड के पास एक चाय की टपरी पर रिश्वत लेते हुए पकड़ा था। रिश्वतखोर ASI दिनेश रघुवंशी के खिलाफ सिवनी जिले के छितापार गांव के रहने वाले नंदकिशोर चौरसिया ने लोकायुक्त कार्यालय जबलपुर में शिकायत की थी। शिकायत में फरियादी ने बताया था कि उसके बेटे अभिषेक चौरसिया को नौकरी दिलाने एवं सरकारी विभाग में गाड़ी लगाने का झांसा देकर शातिर ठगों ने फर्जीवाड़ा किया है। जब वो इस बात की शिकायत दर्ज कराने के लिए कोतवाली थाने पहुंचे तो एएसआई दिनेश रघुवंशी ने उनसे सही रिपोर्ट लिखने और फर्जी सिग्नेचर की जांच करवाने के एवज में 30 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की। बातचीत के बाद सौदा 20 हजार रुपये रिश्वत देना तय हुआ था।