
Narmada River's course नरसिंहपुर. जिले की समृद्धि का मुख्य आधार नर्मदा नदी के प्रवाह क्षेत्र में अत्यधिक उपजाऊ कृषि भूमि है, लेकिन पिछले दो से तीन दशकों में नर्मदा तट की हरित पट्टी लगातार कम होने से मृदा अपरदन की समस्या गंभीर होती जा रही है। स्थिति यह है कि हर वर्ष बड़ी मात्रा में उपजाऊ मिट्टी बहकर नर्मदा में समा रही है। इस चुनौती से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने नर्मदा तट के 91 गांवों में 900 एकड़ से अधिक शासकीय भूमि चिन्हित की है, जहां हरित पट्टी विकसित करने की कार्ययोजना है।
जिले में नर्मदा तट के किनारे पहले बड़ी संख्या में वृक्ष और प्राकृतिक हरित क्षेत्र मौजूद थे, जो मिट्टी के कटाव को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे। लेकिन खेती के विस्तार और अन्य कारणों से बड़ी संख्या में वृक्ष समाप्त हो गए हैं। इसके कारण तटीय क्षेत्रों में मिट्टी का क्षरण बढ़ा है और उपजाऊ कृषि भूमि का हिस्सा कट रहा है।
उद्योगों को भी जोड़ा जाएगा अभियान से
जिला प्रशासन की तैयारी है कि नर्मदा क्षेत्र में हरित पट्टी विकसित करने के लिए औद्योगिक इकाइयों को भी इस कार्ययोजना से जोडऩे कार्रवाई चल रही है। जिले और आसपास संचालित विद्युत परियोजनाओं, औद्योगिक इकाइयों, क्रेशर संचालनकर्ताओं, शुगर मिलों तथा अन्य संस्थानों से नर्मदा तट पर चिन्हित भूमि पर पौधरोपण, सुरक्षा घेराबंदी और संरक्षण कार्य कराने सहयोग लिया जाएगा। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत संस्थाएं पांच वर्ष तक पौधों के संरक्षण का दायित्व निभाएंगी।
पंचायतों और समितियों को सौंपी जाएगी जिम्मेदारी
योजना के अनुसार प्रारंभिक संरक्षण अवधि पूरी होने के बाद विकसित हरित क्षेत्रों का प्रबंधन नवांकुर समितियों, ग्राम पंचायतों और स्वयं सहायता समूहों को सौंपा जा सकता है। इससे स्थानीय स्तर पर संरक्षण के साथ समुदाय की भागीदारी भी बढ़ेगी।
मृदा संरक्षण के साथ पर्यावरण को मिलेगा लाभ
विशेषज्ञों के अनुसार कार्ययोजना अनुसार यदि सक्रियता से कार्य होगा तो नर्मदा तट पर हरित पट्टी विकसित होने से मिट्टी का कटाव कम होगा। भूजल संरक्षण को बल मिलेगा और नदी तटीय पारिस्थितिकी तंत्र को भी मजबूती मिलेगी। इसके साथ ही जैव विविधता संरक्षण और जलवायु संतुलन की दिशा में भी यह पहल महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
फैक्ट फाइल
नर्मदा तट के 91 गांवों में भूमि चिन्हित
900 एकड़ से अधिक शासकीय भूमि प्रस्तावित
हरित पट्टी विकसित करने की तैयारी
उद्योगों को पौधारोपण व संरक्षण से जोड़ा जाएगा
पांच वर्ष बाद स्थानीय समितियों को सौंपी जा सकती है जिम्मेदारी
वर्जन
नर्मदा क्षेत्र को संरक्षित और हरित पट़्टी विकसित करने के लिए कार्ययोजना तैयार की गई है। जिसमें उद्यानिकी और वानिकी को बढ़ावा दिया जाएगा। निश्चित तौर पर हरित पट़्टी से न केवल कटाव कम होगा बल्कि तटीय क्षेत्र का सौंदर्य बढ़ेगा।