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‘आत्मा भटकती है, उसे शांत करने के लिए बनाया मंदिर’, सरकारी स्कूल में शिक्षकों का गजब कारनामा

उत्तराखंड के एक सरकारी स्कूल में अनोखा कारनामा देखने को मिला है। स्कूल में भटकती आत्मा को शांत करने के लिए शिक्षकों ने एक मंदिर बनवाया है।
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Apr 05, 2026
Temple built in government school
स्कूल में मंदिर सांकेतिक AI इमेज

उत्तराखंड में बागेश्वर जिले के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल कौसानी के एक सरकारी स्कूल में चौकाने वाला मामला सामने आया है। कौसानी के एक सरकारी स्कूल में कथित तौर पर आत्मा को शांत करने के लिए मंदिर बनाया गया है। स्कूल परिसर में मंदिर बनाने के लिए शिक्षकों ने स्टूडेंट्स से पैसे इकट्ठा किए। मामला संज्ञान में आने पर शिक्षा विभाग ने जांच का आदेश दिया है। यह घटना शिक्षा व्यवस्था में अंधविश्वास और अनियमितताओं को लेकर सवाल खड़े कर रही है।

स्कूल में 30 साल से भटक रही आत्मा

कौसानी के एक सरकारी स्कूल में मंदिर बनवाया गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस स्कूल में करीब 30 साल से एक नेपाली मजदूर की आत्मा भटक रही है। बताया जा रहा है कि मजदूर की इस स्कूल में गिरकर मौत हो गई थी। लोगों का कहना है कि मजदूर के मरने के बाद उसकी आत्मा स्कूल में भटक रही है। इसलिए यहां कुछ न कुछ अशुभ होता है।

आत्मा का स्टूडेंट्स पर साया

स्थानीय लोगों के मुताबिक, कुछ महीने पहले स्कूल में कई छात्राएं बेहोश हो गई थीं। मेडिकल जांच में सामने आया कि छात्राओं को कोई भी बीमारी नहीं थी लोगों ने इस घटना के पीछे आत्मा का साया समझ लिया। इसके बाद स्कूल प्रबंधन ने आत्मा को शांत करने के लिए परिसर में एक छोटा मंदिर बनाने का फैसला किया।

मंदिर बनाने के लिए स्टूडेंट्स से इकट्ठा किए पैसे

स्कूल में मंदिर बनवाने के लिए स्टूडेंट्स से पैसे जुटाए गए। इस साल जनवरी में पैरेंट-टीचर एसोसिएशन ने कक्षा 6 से 12 तक के 218 छात्रों से 100-100 रुपए इकट्ठा किए। पैरेंट-टीचर एसोसिएशन ने भी मंदिर बनाने के लिए पैसे दिए। इसके बाद कुल 25,000 रुपए की लागत से मंदिर का निर्माण कराया गया।

शिक्षा विभाग ने दिए जांच के आदेश

सरकारी स्कूल में मंदिर बनाने का मामला संज्ञान में आने पर शिक्षा विभाग ने एक्शन लिया है। विभाग ने छात्रों से बिना अनुमति के अवैध वसूली करने और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप के लिए जांच का आदेश दिया है। इस मामले की जांच की जिम्मेदारी खंड शिक्षाधिकारी गरुड़ को सौंपी गई है।

क्या बोले प्रिंसिपल?

अनोखा कारनामा करने वाले सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल ताजबर सिंह नेगी ने अपना बचाव करते हुए कहा कि पैसे अभिभावकों की सहमति से जुटाए गए थे। हमारा उद्देश्य सिर्फ स्कूल में शांत माहौल बनाना था, ताकि बच्चे बिना किसी भय के पढ़ाई कर सकें। उन्होंने आगे कहा कि हमारा मकसद पढ़ाई के लिए शांत माहौल बनाना था।

Updated on:
05 Apr 2026 03:08 am
Published on:
05 Apr 2026 03:08 am
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