टली ने भारत को अपना घर माना, और 1994 में बीबीसी से इस्तीफा देकर वे दिल्ली के वेस्ट निजामउद्धीन में रहने लगे। उन्होंने ओवरसीज सिटीजनशिप ऑफ इंडिया प्राप्त की।
मार्क टली भारत पर जान निसार करते थे। वे एक ऐसे ब्रिटिश पत्रकार थे जिन्होंने अपना जीवन भारत को समर्पित कर दिया। वे पिछले कुछ समय से बीमार थे और उनकी अंतिम दिनों में देखरेख उनकी मित्र जिलियन राइट और बीबीसी के उनके साथी रहे सतीश जैकब कर रहे थे। कोलकाता के टॉलीगंज में जन्मे टली का भारत से रिश्ता बचपन से ही जुड़ा हुआ था। उनकी विरासत पर चर्चा करना हमेशा प्रासंगिक रहेगा। टली ने बीबीसी के लिए दशकों तक भारत से रिपोर्टिंग की, और उनका भारत से प्रेम उनकी किताबों, साक्षात्कारों और जीवनशैली में स्पष्ट रूप से झलकता है।
टली ने भारत को अपना घर माना, और 1994 में बीबीसी से इस्तीफा देकर वे दिल्ली के वेस्ट निजामउद्धीन में रहने लगे। उन्होंने ओवरसीज सिटीजनशिप ऑफ इंडिया प्राप्त की। यानी वे भारत के नागरिकता ले चुके थे। वे हिंदी में धाराप्रवाह बोलते थे, और भारतीय त्योहारों में भाग लेते थे। एक बार उन्होंने कहा था कि भारत ने उन्हें सिखाया कि जीवन में संतुलन जरूरी है, और यहां की संस्कृति ने उन्हें अहंकार से मुक्त किया।
टली का भारत से प्रेम कोई सतही आकर्षण नहीं रहा; यह एक गहन सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जुड़ाव था। उनका जन्म जब हुआ तब भारत में ब्रिटिश सरकार का राज था। उनके पिता रेलवे अधिकारी थे। बचपन में ही उन्होंने भारत की विविधता को करीब से देखा। दार्जिलिंग में बिताए दिन उनके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे, जहां उन्होंने भारतीय संस्कृति की झलक पाई। कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से थियोलॉजी में डिग्री लेने के बाद, वे पादरी बनने की राह पर थे, लेकिन फिर उन्होंने बीबीसी जॉइन किया।
उन्होंने एक बार बताया था कि वे 1965 में भारत आए बीबीसी के ब्यूरो चीफ बनकर, और फिर अगले 30 वर्षों तक उन्होंने भारत की राजनीति, समाज और संस्कृति को दुनिया के सामने पेश किया। उन्होंने 1971 के भारत-पाक युद्ध, भोपाल गैस त्रासदी, इंदिरा गांधी की हत्या, सिख दंगों, राजीव गांधी की हत्या और बाबरी मस्जिद विध्वंस जैसी घटनाओं को कवर किया।
टली का भारत प्रेम उनकी रिपोर्टिंग में साफ दिखता है। वे भारत को एक जटिल लेकिन जीवंत देश के रूप में चित्रित करते हैं, जहां परंपरा और आधुनिकता का संघर्ष चलता रहता है। उनकी किताब 'नो फुल स्टॉप्स इन इंडिया' (1988) में वे लिखते हैं कि भारत में कभी पूर्ण विराम नहीं लगता; यहां जीवन निरंतर बहता रहता है। इस किताब में उन्होंने भारतीय ग्रामीण जीवन, धार्मिक सहिष्णुता और सामाजिक मुद्दों पर निबंध लिखे, जो उनके गहन अवलोकन को दर्शाते हैं। टली कहते थे कि भारत ने उन्हें सिखाया कि ईश्वर तक पहुंचने के कई रास्ते हैं, और यहां के समावेशी समाज ने उनके ईसाई विश्वास को समृद्ध किया। वे कहते थे, 'भारत की विशेषता है कि यहां विभिन्न धर्म एक साथ रहते हैं, और यही मुझे सबसे ज्यादा आकर्षित करता है'।
उनकी एक और किताब 'द हार्ट ऑफ इंडिया' (1995) में उन्होंने काल्पनिक कहानियों के माध्यम से भारत के दिल को छुआ। ये कहानियां ग्रामीण भारत की गरीबी, प्रेम और संघर्ष को दर्शाती हैं, और दिखाती हैं कि टली कितनी गहराई से भारतीय जीवन को समझते थे। 'इंडियाज अनएंडिंग जर्नी' (2008) में वे भारत की आध्यात्मिक यात्रा पर चर्चा करते हैं, जहां वे कहते हैं कि पश्चिमी आधुनिकता भारत की आत्मा को नहीं बदल सकती।
टली का भारत प्रेम उनकी व्यक्तिगत जिंदगी में भी झलकता है, खासकर उनकी साथी जिलियन राइट के साथ। जिलियन राइट एक ब्रिटिश लेखिका और अनुवादक हैं, जो हिंदी और उर्दू में माहिर हैं। वे 1980 के दशक से टली के साथ रह रही थीं, और दोनों दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में साथ रहते थे। टली की शादी मार्गरेट से हुई है, जिनके साथ उनके चार बच्चे हैं और जो लंदन में रहती हैं, लेकिन भारत में टली का जीवन जिलियन के साथ जुड़ा है। यह रिश्ता एक आधुनिक प्रेम कहानी है, जहां दोनों ने भारत की संस्कृति को अपनाया। जिलियन ने कई हिंदी किताबों का अंग्रेजी अनुवाद किया।
टली कहते थे कि जिलियन ने उन्हें हिंदी साहित्य से परिचित कराया, जो उनके भारत प्रेम को और मजबूत करता है। यह संबंध भारत की उदारता को दर्शाता है। जिलियन के साथ उनका जीवन भारत की बहुलता का प्रतीक है। टली की कहानी साबित करती है कि प्रेम की कोई सीमा नहीं होती; यह संस्कृतियों को जोड़ता है।