आंतरिक संकट से जूझ रही आम आदमी पार्टी (AAP) को पंजाब में विधायकों की तोड़-फोड़ की चिंता सता रही है। पंजाब में विधायकों की तोड़-फोड़ की आशंका के चलते AAP नेतृत्व चौकान्ना हो गया है और काउंटर रणनीति तैयार कर रहा है।
दस में से 7 सांसदों के भाजपा में जाने के बाद अब तक के सबसे बड़े आंतरिक संकट से जूझ रही आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए पंजाब में अपनी साख बचाना बड़ी चुनौती बन गया है। सूत्रों के अनुसार, पार्टी को आशंका है कि बगावत करने वाले 7 में से 6 सांसद पंजाब के होने के कारण बड़ी संख्या में विधायकों को बहला कर पार्टी से दूर कर सकते हैं।
राघव चड्ढा सहित AAP के 7 राज्यसभा सांसदों द्वारा बीजेपी का हाथ थामने के बाद पंजाब में विधायकों की तोड़-फोड़ का खतरा मंडरा रहा है। पंजाब में CM भगवंत मान के नेतृत्व वाली AAP की सरकार को फिलहाल कोई खतरा नजर नहीं आ रहा है। पंजाब की 117 सदस्यीय विधानसभा में 95 AAP विधायकों के समर्थन वाली सरकार है।
AAP को पंजाब में विधायकों की तोड़-फोड़ की चिंता सता रही है। माना जा रहा है कि पंजाब में विधायकों की तोड़-फोड़ अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले AAP को भारी पड़ सकती है। AAP नेतृत्व को भाजपा का दामन थामने वाले राघव चड्ढा का कुछ विधायकों से संपर्क मिलने की जानकारी हुई है। इस जानकारी के बाद AAP सतर्कता बरत रही है और काउंटर रणनीति तैयार की जा रही है।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने विधायकों के साथ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात का समय मांगा है। भगवंत मान ने कहा है कि वह राष्ट्रपति से मिलकर सातों बागी सांसदों को अयोग्य घोषित करने की मांग करेंगे। पंजाब में AAP कार्यकर्ताओं ने लुधियाना व जालंधर में पार्टी के बागी सांसदों के घरों के बाहर प्रदर्शन किया और दीवारों पर 'गद्दार' लिख दिया। वहीं, पश्चिम बंगाल के बारानगर में रोड शो के दौरान AAP के 7 सांसदों द्वारा पार्टी छोड़ने पर भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा- अभी और भी बहुत कुछ होना बाकी है, आगे आगे देखिए होता है क्या।
AAP को बड़ा खतरा बागी सांसद राघव चड्ढा और संदीप पाठक से है। पिछले विधानसभा चुनाव के समय दोनों नेता पार्टी संगठन, रणनीति व टिकट वितरण में अहम भूमिका में थे। सूत्रों के अनुसार, 50 प्रतिशत से ज्यादा मौजूदा विधायकों को टिकट इन दोनों नेताओं ने दिलवाए थे। चड्ढा और अन्य भाजपा नेता पंजाब के विधायकों से संपर्क कर रहे हैं। ऐसे में AAP नेतृत्व विधायकों से संवाद बढ़ाकर कमजोर कडियों को चिन्हित करके आगे की रणनीति में जुट गया है। पार्टी का मानना है कि अभी प्रदेश में भाजपा की ज्यादा पैठ नहीं है, लेकिन चड्ढा व पाठक के जरिए वह 'मिशन पंजाब' के तहत पूरी बाजी बदलने के दांव चलेगी।