
Abhijeet Dipke on BJP-RSS: CJP के फाउंडर अभिजीत दीपके ने BJP को सलाह दी है कि वे RSS प्रमुख मोहन भागवत के बयानों को गंभीरता से लें। उन्होंने कहा कि BJP को यह नहीं भूलना चाहिए कि सत्ता में आने से वह RSS से बड़ी नहीं हो गई है। दीपके ने कहा कि पार्टी को अपने 'मार्गदर्शक' मोहन भागवत की बात सुननी चाहिए और उनके सबको साथ लेकर चलने वाले नजरिए पर ध्यान देना चाहिए। दीपके ने आरोप लगाया कि केंद्र में लंबे समय तक शासन करने और विभिन्न सरकारी एजेंसियों पर नियंत्रण रखने के बाद BJP को यह गलतफहमी हो गई है कि वह खुद RSS से भी बड़ी शक्ति बन चुकी है, जबकि हकीकत यह है कि वह उसी संगठन के सहारे सत्ता के शिखर तक पहुंची है।
छत्रपति संभाजीनगर में पत्रकारों से बात करते हुए अभिजीत दीपके ने कहा कि बीजेपी नेताओं को अपने मार्गदर्शक मोहन भागवत की सलाह पर ध्यान देना चाहिए और उस पर अमल करना चाहिए। उन्होंने कहा कि संघ प्रमुख ने स्पष्ट रूप से कहा है कि जो कोई भी भारत में मुसलमानों के अस्तित्व से इनकार करता है, वह हिंदू नहीं हो सकता। फिर भी, बीजेपी नेतृत्व संगठन के इस मूल सिद्धांत से भटक रहा है। दीपके ने दावा किया कि लगभग 12 वर्षों तक सत्ता में रहने और विभिन्न एजेंसियों पर नियंत्रण रखने के बाद, बीजेपी को कुछ हद तक यह महसूस होने लगा है कि वह आरएसएस से बड़ी हो गई है।
अभिजीत दीपके ने युवा पीढ़ी के प्रदर्शनों पर सरकार के रुख पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मोहन भागवत ने पहले सार्वजनिक रूप से कहा था कि अपने अधिकारों के लिए आवाज उठा रही नई पीढ़ी यानी Gen Z को राष्ट्रविरोधी या एंटी-नेशनल न कहा जाए। इसके बावजूद प्रधानमंत्री ने असहमति जताने वाले युवाओं के लिए 'दिमागी नक्सल' जैसे शब्दों का प्रयोग किया। उन्होंने कहा कि एक तरफ संघ प्रमुख युवाओं के सम्मान और समाज को जोड़ने की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकार की तरफ से युवाओं का अपमान किया जा रहा है, जो बिल्कुल अनुचित है।
सामाजिक कार्यकर्ता मनोज जारांगे पाटिल के नेतृत्व में चल रहे मराठा आरक्षण आंदोलन का समर्थन करते हुए अभिजीत दीपके ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था से जनता का भरोसा कम हो रहा है। उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति केवल शौक के लिए चिलचिलाती धूप में सड़कों पर भूख हड़ताल पर नहीं बैठता। विरोध प्रदर्शन हमेशा आखिरी रास्ता होता है, जो मजबूरी में तब किया जाता है जब बातचीत और अपील जैसे अन्य सभी रास्ते खत्म हो जाते हैं।
दीपके ने कहा कि मनोज जारांगे मराठा समुदाय के बच्चों के लिए बेहतर शिक्षा और नौकरी की मांग कर रहे हैं, जो आज का सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने युवाओं को अच्छी शिक्षा और रोजगार दिया होता, तो स्थिति कभी ऐसी नहीं होती कि किसी को विरोध प्रदर्शन का सहारा लेना पड़ता।
अभिजीत दिपके ने यह भी कहा कि वे जल्द ही मनोज जारांगे पाटिल से व्यक्तिगत रूप से मिलने के लिए जालना जाएंगे। उन्होंने याद किया कि जब वे दिल्ली में छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों के लिए संघर्ष कर रहे थे, तब मनोज जारांगे खुद उन्हें समर्थन देने के लिए राजधानी आए थे। इसलिए, वे इस मुश्किल समय में मनोज जारांगे के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होना और उनके आंदोलन को मजबूत करना अपना नैतिक कर्तव्य मानते हैं।