
प्रवक्ताओं के साथ अभिजीत दिपके। फाइल फोटो- आईएएनएस
CJP Sansad Chalo March : कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक और संयोजक अभिजीत दिपके ने 20 जुलाई के ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान अपने दोनों प्रवक्ताओं के गायब रहने पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं के साथ बैठक के लिए बुलाए गए आशुतोष रांका और सौरव दास करीब पांच घंटे तक वहां रहे, जबकि बैठक केवल 10 मिनट चली। इस दौरान भीड़ मार्च आगे बढ़ाने की मांग कर रही थी और उनके पास उसे संभालने की पर्याप्त ताकत नहीं थी।
दिपके ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि 20 जुलाई को उनके अनशन का तीसरा दिन था। इसी दौरान भाजपा नेताओं ने रांका और दास को बातचीत के लिए बुलाया। दोनों बैठक में चले गए। दिपके के मुताबिक उन्हें करीब पांच घंटे तक वहां रोके रखा गया, जबकि बातचीत महज 10 मिनट हुई। उन्होंने कहा कि इस दौरान जंतर-मंतर पर मौजूद भीड़ बेकाबू हो रही थी और संसद की ओर मार्च शुरू करना चाहती थी। दिपके ने दोनों को कई बार फोन किया, लेकिन उनके फोन नहीं लगे। उन्होंने कहा कि वह दोनों से काफी गुस्सा हो गए थे, क्योंकि अनशन के तीसरे दिन उनके पास भीड़ को संबोधित करने की ताकत नहीं बची थी।
दिपके ने कहा कि उनका मकसद मार्च निकालना था, लेकिन वह जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ना चाहते थे। उनका कहना था कि ऐसा कोई कदम नहीं उठाया जाना था, जिससे किसी के लिए परेशानी खड़ी हो। उन्होंने बताया कि उस समय वह लगातार आशुतोष रांका और सौरव दास को फोन कर रहे थे और पूछ रहे थे कि वे कहां हैं। यह पूछे जाने पर कि अगर उन्हें उस दिन दोबारा फैसला लेने का मौका मिलता तो क्या कुछ अलग करते। इस पर दिपके ने कहा कि वह दोनों प्रवक्ताओं को बैठक में नहीं जाने देते।
उन्होंने माना कि उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि लंबे अनशन के दौरान किस तरह खुद को संभालना चाहिए। पहले दो दिनों तक वह लगातार भीड़ को संबोधित करते और लोगों से बातचीत करते रहे। इसका असर तीसरे दिन उनकी सेहत पर पड़ा। दिपके ने बताया कि मार्च वाले दिन सुबह वह बेहोश भी हो गए थे। चलने की हालत नहीं होने के कारण उन्हें एक ट्रक पर बैठना पड़ा। उनका कहना था कि अगर रांका और दास जंतर-मंतर पर मौजूद होते तो भीड़ को संभालना और मार्च का नेतृत्व करना उनके लिए काफी आसान होता।
20 जुलाई को संसद के मानसून सत्र के पहले दिन दिपके ने संसद चलो मार्च का नेतृत्व किया था। यह 37 दिनों से चल रहे उस आंदोलन का हिस्सा था, जिसमें नीट-यूजी परीक्षा में अनियमितताओं को लेकर तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की जा रही थी। प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर से संसद, रायसीना रोड, जनपथ, कनॉट प्लेस और इंडिया गेट तक फैल गए थे। संसद पहुंचने की कोशिश के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच कई बार झड़प हुई। 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद आंदोलन समाप्त कर दिया गया।
Updated on:
30 Aug 2026 08:17 pm
Published on:
30 Aug 2026 07:53 pm
