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'चन्द्रमहल' के रूप में प्रसिद्ध जयपुर के जंतर—मंतर का निर्माण 1728-1734 ई. में राजपूत राजा सवाई जय सिंह ने कराया था। प्राचीन खगोलीय यंत्रों और जटिल गणितीय संरचनाओं के माध्यम से ज्योतिषीय और खगोलीय घटनाओं का विश्लेषण और सटीक भविष्यवाणी करने के लिए यह जगह आज भी जानी जाती है। यह ऐतिहासिक स्मारक भारत में मौजूद कुल 5 खगोलीय वेधशालाओं में से है। वर्ष 2010 में यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर स्थल घोषित किया।