
नेपाल बाढ़ पर सद्गुरु जग्गी वासुदेव का बयान। फोटो- आईएएनएस
नई दिल्ली। नेपाल में हाल की बाढ़ और तबाही पर आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने कहा कि प्राकृतिक घटनाओं के पीछे दैवीय कारण तलाशने के बजाय उन्हें भौतिक नियमों और परिस्थितियों के आधार पर समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि पिछले 10 साल में नेपाल के लोगों ने लगातार आपदाओं का सामना किया है और इन घटनाओं में अपनों को खोने का दर्द आज भी लोगों के दिलों में मौजूद है। काठमांडू में सद्गुरु ने नेपाल में आई हाल की बाढ़ और उससे हुई तबाही पर कहा कि ऐसे समय में लोग इस घटना के पीछे कारण तलाशने लगते हैं और कई बार इसे किसी दैवीय वजह से जोड़ने की कोशिश करते हैं।
उन्होंने कहा कि हमें ऐसी चीजों में अपना समय बर्बाद नहीं करना चाहिए। दिव्यता एक अलग पहलू है, जबकि भौतिक घटनाएं भौतिक नियमों के अनुसार होती हैं। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों में नेपाल में जो हुआ, उसे इसी नजरिए से समझना चाहिए। सद्गुरु ने कहा कि पिछले 10 साल में नेपाल के लोगों को कई बड़े झटकों और आपदाओं का सामना करना पड़ा है। इन घटनाओं में घर तबाह हुए और लोगों ने अपने प्रियजनों को खोया। सद्गुरु ने कहा कि जिन लोगों की मौत हुई, वे भले ही अब समाचार पत्रों में दिखाई नहीं देते हों, लेकिन उन्हें चाहने वाले लोगों के दिलों से उनका दर्द और उनकी याद खत्म नहीं हुई है।
सद्गुरु ने पर्यावरण और वैश्विक तापमान बढ़ने के मुद्दे पर युद्धों के प्रभाव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण कार्यकर्ता अक्सर लोगों को कार का इस्तेमाल कम करने या इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने की सलाह देते हैं और पेट्रोल-डीजल वाहनों को पर्यावरण के लिए समस्या बताते हैं। उन्होंने कहा कि वे खुद मोटरसाइकिल चलाते समय इस बात का ध्यान रखते हैं कि जरूरत से एक मिनट भी ज्यादा इंजन चालू न रहे।
उनके मुताबिक आम लोग छोटी-छोटी चीजों के जरिए पर्यावरण में अपने योगदान को लेकर चिंतित रहते हैं, लेकिन दुनिया में चल रहे युद्धों के प्रभाव पर उतनी चर्चा नहीं होती। सद्गुरु ने कहा कि युद्धों में इस्तेमाल होने वाली मिसाइलों और बड़े पैमाने पर होने वाली सैन्य गतिविधियों से निकलने वाली गर्मी और पर्यावरणीय प्रभाव को भी समझना जरूरी है। उन्होंने कहा कि एक मिसाइल का प्रभाव लाखों मोटरसाइकिलों या कारों के बराबर हो सकता है। प्रमुख देशों के बीच लड़े जा रहे युद्धों से पैदा होने वाली गर्मी और तापमान वृद्धि के प्रभाव का आकलन करना भी जरूरी है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण की व्यक्तिगत जिम्मेदारी को खारिज नहीं किया, लेकिन युद्धों के पर्यावरणीय प्रभाव को भी चर्चा का हिस्सा बनाने की जरूरत बताई।
Updated on:
30 Aug 2026 07:21 pm
Published on:
30 Aug 2026 06:56 pm
