
Cockroach Janata Party: NEET पेपर लीक मामले में प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ देशभर में दर्ज एफआईआर रद्द करने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 5 सितंबर को प्रस्तावित मार्च वापस लेने का फैसला किया है। CJP के नेता अभिजीत दीपके ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि आज सही मायने में इंसाफ हुआ है। अभिजीत दीपके ने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट का दिल से धन्यवाद करते हैं। उनके मुताबिक यह फैसला उन सभी लोगों के लिए न्याय है, जिन्होंने जंतर-मंतर और देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन के दौरान अपनी आवाज उठाई थी।
अभिजीत दीपके ने कहा कि यह सिर्फ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने वालों की जीत नहीं है, बल्कि देशभर में आंदोलन का हिस्सा बने हर व्यक्ति की जीत है। उन्होंने कहा कि विरोध के दौरान किसी ने भी जिस तरीके से अपनी आवाज उठाई हो, महत्वपूर्ण यह है कि उसने अपनी आवाज उठाई। अभिजीत दीपके ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उन्हें लगता है कि आंदोलन में शामिल हर व्यक्ति की जीत हुई है।
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने भी CJP के 5 सितंबर के प्रस्तावित प्रदर्शन को वापस लेने के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि 25 जुलाई 2026 को उन्होंने और केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की थी। जेपी नड्डा के मुताबिक, भारत सरकार की ओर से छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए उन्हें भरोसा दिया गया था कि प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ दर्ज मामले वापस लिए जाएंगे और उनके खिलाफ आगे कोई कड़ी कार्रवाई नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर भाजपा शासित राज्यों की सरकारों के साथ भी बातचीत की गई है और सरकार अपना आश्वासन पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ेगी।
जेपी नड्डा ने CJP के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि 5 सितंबर को प्रस्तावित प्रदर्शन वापस लेने का संगठन का निर्णय सकारात्मक है। उन्होंने कहा कि सरकार के लिए युवाओं की प्रगति और विकास सर्वोच्च प्राथमिकता है।
CJP ने पहले 5 सितंबर को मार्च निकालने का ऐलान किया था। पार्टी का कहना था कि सरकार की ओर से प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने को लेकर सकारात्मक भरोसा मिलने के बावजूद उसे इस बात की चिंता थी कि आश्वासन को लागू किया जाएगा या नहीं। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से इस मामले में स्थिति स्पष्ट किए जाने और अदालत के आदेश के बाद CJP ने प्रस्तावित मार्च वापस लेने का फैसला किया।
CJP की ओर से अदालत को बताया गया कि केंद्र सरकार के सकारात्मक आश्वासन, सुप्रीम कोर्ट के आदेश और अदालत की न्यायिक गरिमा को देखते हुए 5 सितंबर के मार्च का आह्वान वापस लेना उचित समझा गया।