
Lawyers March Against Gyanesh Kumar: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ वकीलों के मार्च को लेकर कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने बताया कि विपक्षी दलों के नेता और 300 से 400 वकील सुप्रीम कोर्ट से कनॉट प्लेस तक गए। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस कदम का मुख्य न्यायाधीश (CJI) से मुलाकात करने से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि हमारे मार्च में बड़ी संख्या में चिंतित नागरिक, गुस्से में मौजूद और असंतुष्ट लोग भी शामिल रहे।
अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि इस कदम को CJI से मुलाकात से जोड़ना गलत है। उन्होंने बताया कि विपक्षी दलों के वकीलों के साथ बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी शामिल थे, जो मौजूदा हालात से नाराज और असंतुष्ट हैं। सभी लोग सुप्रीम कोर्ट से कनॉट प्लेस तक गए और फिर वापस लौटे। सिंघवी के मुताबिक, यह कदम अपना विरोध और नाराजगी जाहिर करने के साथ-साथ कानूनी रास्ता अपनाने से जुड़ा है।
जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाए जाने के सवाल पर सिंघवी ने इसे सत्ता का गलत इस्तेमाल बताया। उन्होंने कहा कि इससे पहले जब जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से नहीं हटाया गया था, तब भी लोगों को वहां जाने से रोका गया था। उनका आरोप है कि इस तरह की रोक के जरिए लोगों को अपनी बात रखने से रोका जा रहा है।
साथ ही इंडिया गठबंधन के आठ नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। यह याचिका मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ है। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, सौगत रॉय, अखिलेश यादव, तेजस्वी प्रसाद यादव, संजय राउत, एम. ए. बेबी और डी. राजा शामिल हैं।
इससे पहले विपक्षी नेताओं का सुप्रीम कोर्ट तक पैदल मार्च शुरू हो गया था। इस मार्च में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे समेत विपक्ष के नेता मौजूद है। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस सांसद चरणजीत सिंह चन्नी ने कहा कि देश भर से लोग यहां आए हैं और दिल्ली ठप हो गई है। हम SIR और 'वोट की चोरी' के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा कि बीजेपी की सरकार ने हरियाणा, असम और बिहार में इसी तरह वोटर लिस्ट में गड़बड़ी की और चुनाव में धांधली की है। साथ ही उन्होंने कहा कि अब ये पंजाब में भी ऐसा ही करने की तैयारी कर रहे हैं।